Wednesday, 25 February 2026

पत्नी पर अवैध संबंध के आरोप लगाकर दायर याचिका हाईकोर्ट ने खारिज की, पति पर 50 हजार रुपए की लागत


पत्नी पर अवैध संबंध के आरोप लगाकर दायर याचिका हाईकोर्ट ने खारिज की, पति पर 50 हजार रुपए की लागत

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राजस्थान हाईकोर्ट ने अलवर निवासी एक व्यक्ति द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने अपनी पत्नी पर अवैध संबंध होने और एक बच्चे को अवैध हिरासत में रखने का आरोप लगाया था। मामले की सुनवाई जस्टिस महेंद्र गोयल और जस्टिस समीर जैन की खंडपीठ ने की। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत तथ्यों से यह साबित नहीं होता कि बच्चा किसी अवैध हिरासत में रखा गया है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि बच्चा अपनी मां और उसके जैविक पिता के साथ रह रहा है और स्वयं याचिकाकर्ता यह स्वीकार कर रहा है कि बच्चा उसका नहीं है, तो अवैध हिरासत का मामला बनता ही नहीं है।

याचिका में पति ने आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी मई 2024 से अपनी बहन और जीजा के साथ रह रही है तथा उसका अपने जीजा के साथ अवैध संबंध है। पति का दावा था कि पत्नी ने अपनी पहचान छिपाकर अस्पताल में एक बच्चे को जन्म दिया और बच्चे की जान को खतरा है। इसी आधार पर उसने गृह सचिव, एडीजी ह्यूमन ट्रैफिकिंग, एसपी अलवर और संबंधित थानाधिकारी को सुरक्षा संबंधी निर्देश देने की मांग की थी।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि याचिकाकर्ता इससे पहले अलवर की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-3 की अदालत में भी बच्चे की बरामदगी के लिए परिवाद प्रस्तुत कर चुका था, जिसे वहां पहले ही खारिज किया जा चुका है। अदालत ने यह भी कहा कि स्वयं पति ने अपने परिवाद में यह स्वीकार किया था कि वह बच्चे का जैविक पिता नहीं है, जिससे उसकी याचिका की आधारहीनता स्पष्ट होती है।

मामले की जांच के दौरान पुलिस द्वारा दो अलग-अलग रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की गईं। पहली रिपोर्ट में महिला द्वारा बच्चे को जन्म देने से इनकार किया गया था, जबकि पड़ोसियों के बयान में बच्चे के जन्म की संभावना जताई गई। मजिस्ट्रेट कोर्ट के निर्देश पर की गई दूसरी जांच में पुलिस ने माना कि महिला ने दूसरे नाम से अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया हो सकता है, हालांकि महिला लगातार इससे इनकार करती रही। अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्य अवैध हिरासत साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

खंडपीठ ने टिप्पणी की कि यह याचिका न्यायालय की प्रक्रिया का दुरुपयोग करने के उद्देश्य से दायर प्रतीत होती है। इसलिए अदालत ने याचिका को हर्जाने सहित खारिज करते हुए याचिकाकर्ता पति पर 50 हजार रुपये की लागत (कोस्ट) लगाई।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता प्रकाश ठाकुरिया ने अदालत के फैसले पर असहमति जताते हुए कहा कि मामले के तथ्यों को सही ढंग से नहीं समझा गया है और अब इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की जाएगी।

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