



बागेश्वर धाम के पीठाधीश धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री रविवार शाम राजस्थान के पवित्र तीर्थ पुष्कर पहुंचे, जहां उन्होंने जगत पिता ब्रह्माजी मंदिर में दर्शन कर पूजा-अर्चना की। मंदिर दर्शन के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि जो हिन्दू विभिन्न धार्मिक स्थलों पर चादर चढ़ाने जाते हैं, उन्हें यदि धार्मिक आस्था का पालन करना है तो पुष्कर आकर अपने पितरों के लिए पिंडदान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पितृ कर्म और सनातन परंपराओं का पालन करने से व्यक्ति का जीवन सफल होता है और उसका आध्यात्मिक कल्याण होता है।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने पुष्कर को सतयुग का देवस्थान बताते हुए कहा कि यह भगवान ब्रह्मा की पवित्र भूमि है और 52 शक्ति पीठों में से एक मां भगवती चामुंडा का भी यहां विशेष महत्व है। उन्होंने राजस्थान को वीरों और संतों की भूमि बताते हुए कहा कि यहां की आध्यात्मिक परंपरा देश और दुनिया को मार्गदर्शन देने वाली रही है।
पुष्कर प्रवास के दौरान शाम करीब 7 बजे उन्होंने पुष्कर सरोवर के सप्तऋषि घाट पर भव्य महाआरती में भाग लिया। इसके बाद ब्रह्माजी मंदिर पहुंचकर चार मुखों वाले ब्रह्मा स्वरूप का विधिवत पूजन और दर्शन किए। मंदिर के पुजारी लक्ष्मी निवास कृष्णगोपाल वशिष्ठ ने उनका स्वागत किया और मंदिर व तीर्थ की ऐतिहासिक एवं धार्मिक परंपराओं की जानकारी दी।
मंदिर परिसर के सभा भवन में धीरेंद्र शास्त्री कुछ समय रुके, जहां उन्होंने सादगी का परिचय देते हुए सोफे पर बैठने की बजाय जमीन पर बिछी दरी पर बैठकर श्रद्धालुओं से संवाद किया। उन्होंने बताया कि लगभग दस वर्ष पहले भी वे पुष्कर आए थे और उस समय पुष्कर सरोवर तथा ब्रह्माजी मंदिर के दर्शन करने के साथ चामुंडा माता शक्ति पीठ में तपस्या की थी।
उनके दर्शन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में मौजूद रहे। श्रद्धालुओं ने जय-जय सियाराम के जयघोष के साथ उनका स्वागत किया और आशीर्वाद लिया। शास्त्री के आगमन से पुष्कर का धार्मिक वातावरण और अधिक भक्तिमय हो गया।