



अजमेर जिले के तीर्थराज पुष्कर में आयोजित हनुमंत कथा के दौरान कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री ने हिंदू समाज, धर्म और सामाजिक मूल्यों को लेकर कई विवादित और चर्चित बयान दिए। मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि हिंदुओं को अपने धर्म पर गर्व करना चाहिए और समाज को मजबूत बनाने के लिए अधिक संतानों को जन्म देना चाहिए। उन्होंने कहा कि “हिंदुओं को चार बच्चे पैदा करने चाहिए” और बेटियों को शिक्षा एवं शक्ति का प्रतीक बनने की प्रेरणा देते हुए कहा कि बेटियां आईएएस, आईपीएस, काली और दुर्गा जैसी बनें, लेकिन सोशल मीडिया पर नाचने-गाने की संस्कृति से दूर रहें।
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि दुनिया में हर धर्म के लोगों के अपने विचार हैं, लेकिन सनातन धर्म मानने वालों को अपने धार्मिक मूल्यों और परंपराओं पर चलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू समाज में देवी-देवताओं और आध्यात्मिक परंपराओं की कोई कमी नहीं है, इसलिए समाज को आत्मविश्वास और धार्मिक आस्था के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
जनसंख्या और सामाजिक संतुलन पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि घटती हिंदू आबादी और बढ़ती मजहबी जनसंख्या देश के लिए गंभीर विषय बनती जा रही है। उन्होंने इसे केवल भारत ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर का मुद्दा बताया। धर्मांतरण के कारणों पर बोलते हुए शास्त्री ने आर्थिक तंगी, अशिक्षा और अंधविश्वास को प्रमुख वजह बताया। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से सक्षम लोगों को गरीबों की मदद करनी चाहिए, शिक्षा का विस्तार होना चाहिए और भक्ति के माध्यम से अंधविश्वास समाप्त किया जा सकता है।
पुष्कर में आयोजित तीन दिवसीय हनुमंत कथा की शुरुआत आरती के साथ हुई। कार्यक्रम में राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी शामिल हुईं। कथा के दौरान वसुंधरा राजे मंच पर पहुंचीं, धीरेंद्र शास्त्री को प्रणाम किया और औपचारिकता छोड़ते हुए मंच पर नीचे फर्श पर बैठकर कथा श्रवण किया, जिसका दृश्य चर्चा का विषय बना रहा।
धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और कथा स्थल पर सुरक्षा एवं व्यवस्थाओं के विशेष इंतजाम किए गए। धीरेंद्र शास्त्री के बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।