


राजस्थान विधानसभा में मंगलवार को राजनीतिक हलचल अपने चरम पर रही। दिनभर हंगामे और नारेबाजी के चलते सदन की कार्यवाही सात बार स्थगित करनी पड़ी। लगातार व्यवधान के बाद अंततः शाम 5:30 बजे विधानसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू की गई। सदन में उस समय का माहौल काफी गंभीर और राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहा, क्योंकि बजट चर्चा को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस जारी है।
कार्यवाही शुरू होते ही प्रतिपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने बजट पर अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया प्रस्तुत की। उन्होंने राज्य सरकार की वित्तीय प्राथमिकताओं, विकास योजनाओं और विभिन्न घोषणाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि बजट में आमजन, किसानों, युवाओं और कर्मचारियों की अपेक्षाओं को पूरी तरह से संबोधित नहीं किया गया है। जूली ने विशेष रूप से सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के मुद्दों को उठाते हुए सरकार से स्पष्ट जवाब की मांग की। उनके भाषण के दौरान विपक्षी सदस्यों ने मेज थपथपाकर समर्थन जताया, जबकि सत्ता पक्ष के सदस्यों ने बीच-बीच में अपनी प्रतिक्रिया भी दी।
सदन की कार्यवाही के अनुसार, प्रतिपक्ष के नेता के वक्तव्य के बाद उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी बजट पर हुई बहस का समापन जवाब प्रस्तुत करेंगी। माना जा रहा है कि उनके जवाब में सरकार की ओर से बजट की प्रमुख योजनाओं, राजकोषीय अनुशासन और विकास की रूपरेखा पर विस्तार से स्पष्टीकरण दिया जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि उप मुख्यमंत्री अपने उत्तर में विपक्ष के आरोपों का किस तरह प्रत्युत्तर देती हैं और आगामी वित्तीय वर्ष के लिए सरकार की रणनीति को किस रूप में सामने रखती हैं।
दिनभर चले गतिरोध और शाम को दोबारा शुरू हुई कार्यवाही ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस बार का बजट सत्र बेहद अहम और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। आने वाले वक्त में बजट पर अंतिम चर्चा और जवाब से राज्य की आर्थिक दिशा को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होगी।