Saturday, 14 February 2026

कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की मौत पर पुलिस का खुलासा: फेफड़ों की बीमारी से आया हार्ट अटैक, जहर या साजिश के संकेत नहीं


कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की मौत पर पुलिस का खुलासा: फेफड़ों की बीमारी से आया हार्ट अटैक, जहर या साजिश के संकेत नहीं

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जोधपुर। कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की मौत को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच जोधपुर पुलिस कमिश्नर ओमप्रकाश ने शनिवार शाम आधिकारिक रूप से बड़ा खुलासा किया। मेडिकल बोर्ड की विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने स्पष्ट किया कि साध्वी की मृत्यु का मुख्य कारण फेफड़ों की गंभीर बीमारी के चलते आया हार्ट अटैक (कार्डियोपल्मोनरी अरेस्ट) था।

कमिश्नर ने बताया कि 12 फरवरी को प्राप्त एफएसएल और हिस्टोपैथोलॉजिकल रिपोर्ट के आधार पर मेडिकल बोर्ड ने निष्कर्ष निकाला कि मौत ‘शॉक’ के कारण हुई। यह शॉक फेफड़ों से संबंधित बीमारी—जैसे अस्थमा या सीओपीडी—के चलते आए कार्डियोपल्मोनरी अरेस्ट का परिणाम था। वैज्ञानिक जांच में शरीर में किसी प्रकार का जहर नहीं पाया गया है। साथ ही यौन अपराध, बाहरी या आंतरिक चोट के भी कोई संकेत नहीं मिले हैं।

कंपाउंडर की भूमिका पर सवाल

जांच में यह भी सामने आया कि इलाज के दौरान कंपाउंडर देवी सिंह द्वारा नियमों की अनदेखी की गई थी। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि कुछ दवाओं के प्रभाव को लेकर मेडिकल बोर्ड से दोबारा राय मांगी गई है। अंतिम राय मिलने के बाद कंपाउंडर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और राजस्थान मेडिकल एक्ट, 1952 के तहत कार्रवाई की जाएगी। इस मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी ने सभी साक्ष्य जुटाए हैं।

28 जनवरी को बिगड़ी थी तबीयत

28 जनवरी को जोधपुर के बोरानाडा क्षेत्र स्थित आरती नगर आश्रम में साध्वी की तबीयत अचानक बिगड़ी थी। बताया गया कि उन्हें जुकाम और सांस लेने में तकलीफ थी। इलाज के लिए बुलाए गए कंपाउंडर ने दो इंजेक्शन लगाए, जिसके तुरंत बाद उनकी हालत गंभीर हो गई। परिजन उन्हें पाल रोड स्थित अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

शव को बाद में पोस्टमॉर्टम के लिए एमजीएच मॉर्च्युरी में रखवाया गया। 29 जनवरी को पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। 30 जनवरी को बाड़मेर के परेऊ गांव में उन्हें समाधि दी गई। 2 फरवरी को विसरा सैंपल जांच के लिए भेजे गए और 11 दिन में एफएसएल जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट पुलिस को सौंप दी गई।

पुलिस ने कहा है कि मामले में किसी भी तरह की अफवाहों से बचना चाहिए और जांच के निष्कर्षों पर भरोसा करना चाहिए।

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