



बूंदी। संशोधित पार्वती–कालीसिंध–चंबल लिंक परियोजना, जिसे राम जल सेतु लिंक परियोजना के नाम से जाना जा रहा है, पूर्वी राजस्थान के लिए जल सुरक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल साबित हो रही है। जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने सोमवार को बूंदी जिले के गुहाटा क्षेत्र में निर्माणाधीन चंबल एक्वाडक्ट कार्य स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने लगभग दो किलोमीटर पैदल चलकर परियोजना के हर बिंदु का गहन अवलोकन किया और अभियंताओं व कार्यकारी एजेंसी के साथ मौके पर ही समीक्षा बैठक कर गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने कार्यरत अभियंताओं और श्रमिकों से संवाद किया तथा परियोजना को मिशन मोड में आगे बढ़ाने के लिए श्रम शक्ति की सराहना की। उन्होंने सुरक्षा मानकों की सख्ती से पालना करने के निर्देश देते हुए कहा कि यह परियोजना केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि प्रदेश के करोड़ों लोगों के भविष्य की आधारशिला है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कुशल नेतृत्व में राजस्थान जल आत्मनिर्भरता की ओर तेज़ी से अग्रसर है और यह एक्वाडक्ट जल सुरक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा।
जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने जानकारी दी कि चंबल नदी पर 2.3 किलोमीटर लंबा एक्वाडक्ट बनाया जा रहा है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 2280 मीटर, आंतरिक चौड़ाई 41.25 मीटर और ऊंचाई 7.7 मीटर है। इस एक्वाडक्ट का निर्माण राम जल सेतु लिंक परियोजना के प्रथम चरण के पैकेज-2 के अंतर्गत किया जा रहा है, जिस पर करीब 2 हजार 330 करोड़ रुपये की लागत आएगी। परियोजना का शुभारंभ मई 2025 में हुआ था और इसे जून 2028 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह एक्वाडक्ट एक ओर कोटा जिले की दीगोद तहसील के पीपलदा समेल गांव और दूसरी ओर बूंदी जिले की इंद्रगढ़ तहसील के गुहाटा गांव को जोड़ेगा।
परियोजना की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालते हुए जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने बताया कि कालीसिंध नदी पर बने नवनेरा बैराज से पानी को पंप हाउस के माध्यम से लिफ्ट कर मेज नदी में छोड़ा जाएगा। इसके बाद मेज बैराज से पंप हाउस व फीडर के जरिए पानी गलवा बांध तक पहुंचेगा और वहां से बीसलपुर एवं ईसरदा बांध में प्रवाहित किया जाएगा। इस एक्वाडक्ट के निर्माण से न केवल पेयजल और सिंचाई की व्यवस्था सुदृढ़ होगी, बल्कि आमजन के लिए आवागमन का एक अतिरिक्त मार्ग भी उपलब्ध होगा।
जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने कहा कि ईआरसीपी को वृहद स्वरूप देते हुए लगभग 90 हजार करोड़ रुपये की संशोधित पार्वती–कालीसिंध–चंबल लिंक परियोजना तैयार की गई है। इसके प्रथम चरण में राज्य के 17 जिलों की लगभग 3 करोड़ 25 लाख आबादी को पेयजल सुविधा मिलेगी, साथ ही सिंचाई और उद्योगों के लिए भी पर्याप्त जल उपलब्ध कराया जाएगा। इससे राजस्थान के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई गति मिलेगी और जल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में प्रदेश निर्णायक कदम बढ़ाएगा। निरीक्षण के पश्चात रावत ने अभियंताओं के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक भी की।