



जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा शनिवार को अंतर्मना आचार्य प्रसन्नसागरके सानिध्य में आयोजित ‘हर माह–एक उपवास’ कार्यक्रम में शामिल हुए। यह आध्यात्मिक आयोजन जयपुर के एंटरटेनमेंट पैराडाईज में श्रद्धा, साधना और आत्मिक अनुशासन के वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने आचार्य श्री से आत्मीय भेंट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति में संतों और मुनियों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। जैन मुनि कठोर तपस्या, संयम और साधना के माध्यम से समाज को आध्यात्मिक दिशा प्रदान करते हैं। उनका मार्गदर्शन व्यक्ति को आत्मसंयम, शांति और नैतिक मूल्यों के मार्ग पर अग्रसर करता है। उन्होंने कहा कि आचार्य प्रसन्नसागर जी का जयपुर आगमन प्रदेशवासियों के लिए सौभाग्य का विषय है और ऐसे आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘हर माह–एक उपवास’ जैसे कार्यक्रम आत्मशुद्धि, अनुशासन और आत्मचिंतन को बढ़ावा देते हैं। ऐसे आध्यात्मिक अनुष्ठान न केवल व्यक्ति के जीवन को संतुलित करते हैं, बल्कि सामाजिक समरसता और नैतिक चेतना को भी मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि आज के भौतिकवादी युग में संतों की शिक्षाएं हमें संयम और सादगी का महत्व समझाती हैं।
इस अवसर पर आचार्य प्रसन्नसागर ने मुख्यमंत्री को ‘दिव्य मंगल भक्ति पाठ’ पुस्तक भेंट की। कार्यक्रम में जैन मुनि-साध्वी, जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में साधक उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री के प्रवचनों और उपवास की भावना से प्रेरणा लेकर आत्मिक अनुशासन के संकल्प को अपनाने की बात कही।