



जयपुर। राजस्थान के भजनलाल शर्मा अपनी सादगी, अनुशासन और आमजन से सीधे जुड़ाव के लिए जाने जाते हैं। शनिवार को उन्होंने ऐसा ही एक उदाहरण पेश किया, जिसने पूरे प्रदेश में सकारात्मक संदेश दिया। जयपुर के व्यस्त राजमहल चौराहा पर जब मुख्यमंत्री का काफिला पहुंचा, उसी समय ट्रैफिक सिग्नल लाल हो गया। सामान्यतः मुख्यमंत्री के काफिले के लिए सुरक्षा कारणों से ग्रीन कॉरिडोर बनाया जाता है, लेकिन इस बार मुख्यमंत्री ने स्वयं निर्देश देकर अपनी गाड़ी को वहीं रुकवा दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शनिवार दोपहर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा एक कार्यक्रम से लौट रहे थे। जैसे ही उनका काफिला राजमहल चौराहे पर पहुंचा, ट्रैफिक पुलिस रास्ता साफ कराने की तैयारी कर रही थी, लेकिन मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि नियमों का पालन किया जाए। इसके बाद उनका काफिला लाल बत्ती पर खड़ा रहा। मुख्यमंत्री की कार को सिग्नल पर रुका देख आसपास के वाहन चालक और राहगीर आश्चर्यचकित रह गए।
आमतौर पर वीआईपी मूवमेंट के दौरान ‘जीरो ट्रैफिक’ व्यवस्था लागू की जाती है ताकि सुरक्षा और समय दोनों की बचत हो सके, लेकिन इस मौके पर मुख्यमंत्री ने सुरक्षा प्रोटोकॉल से ऊपर ट्रैफिक अनुशासन को रखा। करीब एक मिनट तक वे अपनी गाड़ी में धैर्यपूर्वक बैठे रहे और जैसे ही सिग्नल हरा हुआ, काफिला आगे बढ़ा।
इस घटना के माध्यम से मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि “आम हो या खास, नियम सबके लिए एक समान हैं।” जयपुर शहर इन दिनों ट्रैफिक जाम की समस्या से जूझ रहा है। मुख्यमंत्री का यह व्यवहार इस बात का उदाहरण बना कि यदि सत्ता के सर्वोच्च पद पर बैठा व्यक्ति नियमों का पालन कर सकता है, तो आम नागरिकों को भी अनुशासन अपनाना चाहिए।
राजमहल चौराहे पर मुख्यमंत्री के रुकने का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं। लोगों ने इस कदम की जमकर सराहना की और इसे वीआईपी कल्चर खत्म करने की दिशा में एक ईमानदार पहल बताया। कई यूजर्स ने लिखा कि लंबे समय बाद किसी मुख्यमंत्री को ट्रैफिक नियमों का पालन करते हुए देखा गया है।
मुख्यमंत्री के इस कदम से ट्रैफिक पुलिसकर्मियों का मनोबल भी बढ़ा है। अक्सर वीआईपी मूवमेंट के दौरान आम जनता का रास्ता रोकने पर पुलिस को नाराजगी झेलनी पड़ती है। इस व्यवहार ने यह स्पष्ट कर दिया कि कानून और व्यवस्था बनाए रखना केवल पुलिस की नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की सामूहिक जिम्मेदारी है।