Friday, 06 February 2026

क्रिकेट–बैडमिंटन किट घोटाला: ईडी जांच में बड़ा खुलासा, पूर्व विधायक बलजीत यादव पर 2.87 करोड़ की हेरफेर का आरोप


क्रिकेट–बैडमिंटन किट घोटाला: ईडी जांच में बड़ा खुलासा, पूर्व विधायक बलजीत यादव पर 2.87 करोड़ की हेरफेर का आरोप

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जयपुर। क्रिकेट और बैडमिंटन किट घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ा खुलासा किया है। ईडी की पूछताछ में सामने आया है कि बहरोड़ विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक बलजीत यादव ने विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (MLA-LAD Fund) में करीब 2.87 करोड़ रुपए की हेरफेर की। जांच एजेंसी के अनुसार, यह राशि अलग-अलग तरीकों से डायवर्ट कर रिश्तेदारों और करीबी लोगों के खातों में ट्रांसफर की गई। इतना ही नहीं, फंड का एक हिस्सा कथित रूप से प्रॉपर्टी खरीदने में भी इस्तेमाल किया गया।

ईडी ने मंगलवार रात अलवर जिले में शाहजहांपुर टोल प्लाजा (दिल्ली-जयपुर हाईवे पर एनएचएआई ऑफिस के पास) से पूर्व विधायक बलजीत यादव को हिरासत में लिया था। इसके बाद उन्हें पूछताछ के लिए जयपुर स्थित ईडी कार्यालय लाया गया, जहां विस्तृत पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। मामले में ईडी ने पीएमएलए (धन शोधन निवारण अधिनियम) के तहत पूर्व विधायक को तीन दिन की रिमांड पर लिया है, ताकि फंड के ट्रेल, बैंक खातों और संपत्ति निवेश से जुड़े पहलुओं की गहन जांच की जा सके।

जांच के मुताबिक, वर्ष 2021-22 में बहरोड़ विधानसभा क्षेत्र के करीब 32 सरकारी स्कूलों के लिए बैडमिंटन और क्रिकेट किट खरीदे गए थे। इन खेल किट्स की खरीद के नाम पर विधायक निधि से करीब 3.72 करोड़ रुपए खर्च दिखाए गए। आरोप है कि वास्तविक आपूर्ति या तो हुई ही नहीं या फिर घटिया सामग्री की आपूर्ति कर भारी भुगतान कर दिया गया। ईडी का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में फर्जी बिलिंग, मिलीभगत और सरकारी धन के दुरुपयोग के संकेत मिले हैं।

ईडी ने दिसंबर 2024 में इस मामले में पीएमएलए एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की थी। इससे पहले भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) भी इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर चुका है। अब ईडी मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हेरफेर की गई राशि किन-किन खातों में गई, किन संपत्तियों में निवेश हुई और इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।

ईडी सूत्रों के अनुसार, रिमांड अवधि के दौरान पूर्व विधायक से लगातार पूछताछ की जाएगी और जरूरत पड़ने पर अन्य आरोपियों या लाभार्थियों को भी जांच के दायरे में लाया जा सकता है। इस मामले ने एक बार फिर विधायक निधि के उपयोग और उसकी निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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