Wednesday, 11 March 2026

BMC मेयर पद पर शिवसेना की दावेदारी के संकेत, एकनाथ शिंदे बोले– जनादेश के खिलाफ नहीं होगा फैसला


BMC मेयर पद पर शिवसेना की दावेदारी के संकेत, एकनाथ शिंदे बोले– जनादेश के खिलाफ नहीं होगा फैसला

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मुंबई। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के मेयर पद को लेकर बड़ा राजनीतिक संकेत दिया है। सोमवार को उन्होंने कहा कि 23 जनवरी से शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे की जन्मशती वर्ष की शुरुआत हो रही है और शिवसैनिकों की यह प्रबल इच्छा है कि इस ऐतिहासिक अवसर पर बीएमसी में शिवसेना का मेयर हो। शिंदे के इस बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नगर निगम नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

हालांकि, एकनाथ शिंदे ने यह भी साफ किया कि शिवसेना कोई ऐसा निर्णय नहीं लेगी जो जनादेश के खिलाफ हो। उन्होंने याद दिलाया कि बीएमसी चुनाव शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी ने गठबंधन में लड़ा था और जिन नगर निगमों में दोनों दलों ने मिलकर चुनाव लड़ा है, वहां महायुति का ही मेयर बनेगा। उनके इस बयान को भाजपा के साथ संतुलन साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

महाराष्ट्र में बीएमसी समेत 29 नगर निगमों के चुनाव 15 जनवरी को हुए थे और 16 जनवरी को नतीजे घोषित किए गए। बीएमसी की कुल 227 सीटों में से भाजपा को 89 सीटें मिली हैं, जबकि शिवसेना (शिंदे गुट) को 29 सीटों पर जीत हासिल हुई है। मेयर पद के लिए बहुमत का आंकड़ा 114 है। ऐसे में भाजपा को मेयर बनाने के लिए शिंदे गुट के कम से कम 25 पार्षदों के समर्थन की आवश्यकता होगी, जिससे गठबंधन की भूमिका बेहद अहम हो गई है।

चुनाव परिणाम आने के बाद शिवसेना ने अपने सभी 29 पार्षदों को मुंबई के बांद्रा स्थित होटल ताज लैंड्स एंड में ठहराया है। पार्टी की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि यह कदम किसी राजनीतिक रणनीति के तहत नहीं, बल्कि पार्षदों के लिए एक ओरिएंटेशन वर्कशॉप आयोजित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। इस वर्कशॉप में देश की सबसे समृद्ध नगर निकाय मानी जाने वाली बीएमसी के कामकाज, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और जिम्मेदारियों की जानकारी दी जा रही है।

कुल मिलाकर, बीएमसी मेयर पद को लेकर शिवसेना और भाजपा के बीच समीकरणों पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। बाल ठाकरे की जन्मशती वर्ष के मद्देनजर शिवसेना की भावनात्मक दावेदारी और जनादेश के सम्मान की बात ने आने वाले दिनों में महायुति के भीतर राजनीतिक मंथन को और तेज कर दिया है।

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