



जयपुर। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) के अंतर्गत रविवार को आयोजित सत्र ‘द पोएट्री ऑफ़ रिमेंबरेंस’ साहित्य, स्मृति और संवेदना का एक भावनात्मक संगम बन गया। यह सत्र बीकानेर के गवर्नमेंट डूंगर कॉलेज में अंग्रेज़ी विभाग की पूर्व विभाध्यक्ष, प्रसिद्ध विद्वान, कवयित्री, अनुवादक और शिक्षिका स्वर्गीय डॉ. दिव्या जोशी की स्मृति को समर्पित रहा।
सत्र का संचालन जयपुर के इंडो-इंग्लिश कवि जगदीप सिंह ने किया, जिन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय की पूर्व अंग्रेज़ी प्रोफेसर एवं जानी-मानी कवयित्री डॉ. मालाश्री लाल से संवाद किया। इस चर्चा में कविता के माध्यम से स्मृतियों, क्षति, शोक और निरंतरता को समझने की कोशिश की गई। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि कविता केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि स्मृति और अनुभवों का जीवंत दस्तावेज़ होती है, जो व्यक्तिगत दुख को सामूहिक चेतना से जोड़ देती है।
सत्र में यह विचार उभरकर सामने आया कि स्मृतियां समय के साथ बदलती हैं और कवि उन्हें अलग-अलग तरीकों से अभिव्यक्त करते हैं—कहीं शांत स्वीकार के रूप में, कहीं गहरे शोक और विरह के रूप में, तो कहीं जानबूझकर संजोए गए दर्द के रूप में। विभाजन की कथाओं, सामूहिक स्मृति और शोकगीत परंपराओं के संदर्भ में चर्चा करते हुए यह बताया गया कि कविता व्यक्तिगत इतिहास के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास को भी स्वर देती है।
इस अवसर पर डॉ. मालाश्री लाल ने अपने नवीनतम कविता संग्रह ‘साइनिंग इन द एयर’ से स्मृति आधारित कविताओं का पाठ किया, जबकि जगदीप सिंह ने अपनी एंथोलॉजी ‘माय एपिटॉफ’ से कविता प्रस्तुत की। साथ ही, स्वर्गीय डॉ. दिव्या जोशी के कविता संग्रह ‘मैत्रयोश्का’ से भी कविता पाठ किया गया। इन सभी रचनाओं ने मिलकर स्मृति, क्षति और निरंतरता पर केंद्रित एक अत्यंत संवेदनशील और आत्मीय साहित्यिक वातावरण रचा, जो श्रोताओं को गहरे तक छू गया।
यह सत्र न केवल डॉ. दिव्या जोशी की साहित्यिक विरासत को स्मरण करने का अवसर बना, बल्कि यह भी रेखांकित किया कि कविता कैसे समय, स्मृति और मानवीय अनुभवों के बीच सेतु का कार्य करती है।