



जयपुर। पिछले पंचायत चुनाव में चुनावी खर्च का ब्योरा जमा नहीं कराने वाले पंच, सरपंच और अन्य जनप्रतिनिधियों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। राज्य चुनाव आयोग ऐसे प्रत्याशियों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी में है। आयोग जल्द ही जिला कलेक्टरों को दिशा-निर्देश जारी कर उन प्रत्याशियों की सूची मंगवा सकता है, जिन्होंने तय समयसीमा में अपने चुनावी खर्च का विवरण जमा नहीं कराया था। ऐसे प्रत्याशियों पर नियमानुसार तीन साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लगाई जा सकती है।
प्रदेश में मार्च–अप्रैल के दौरान पंचायती राज चुनाव प्रस्तावित हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए आयोग पुराने मामलों की समीक्षा कर रहा है। चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, मुखिया, सरपंच, पंच और वार्ड सदस्य पद के लिए चुनाव लड़ने वाले प्रत्येक प्रत्याशी को चुनाव परिणाम घोषित होने के 15 दिनों के भीतर अपने खर्च का पूरा विवरण आयोग को देना अनिवार्य होता है। नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त दंड का प्रावधान है।
साल 2020 में प्रदेश के 21 जिलों में जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव कराए गए थे। उस समय 636 जिला परिषद सदस्यों और 4371 पंचायत समिति सदस्यों के लिए चुनाव हुए थे। पंचायत समिति सदस्य पद के लिए 12,663 और जिला परिषद सदस्य पद के लिए 1778 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा था। राज्य चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, इनमें से बड़ी संख्या में प्रत्याशियों ने चुनाव परिणाम आने के बाद भी खर्च का ब्योरा जमा नहीं कराया था।
अब आयोग जिला निर्वाचन अधिकारियों (कलेक्टरों) को निर्देश देकर ऐसे सभी प्रत्याशियों की विस्तृत सूची तैयार करवाएगा। यह सूची राज्य चुनाव आयोग को भेजी जाएगी, जिसके बाद आयोग यह तय करेगा कि किन प्रत्याशियों पर कार्रवाई की जाए।
राज्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह ने स्पष्ट किया है कि चुनावी खर्च का विवरण नहीं देने पर तीन साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लगाने का नियम है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में आयोग जल्द ही औपचारिक आदेश जारी करेगा और जिला कलेक्टरों से पूरा विवरण मंगवाया जाएगा।
आयोग की इस सख्ती से आगामी पंचायत चुनावों से पहले कई पूर्व पंच-सरपंचों और जनप्रतिनिधियों की राह मुश्किल हो सकती है। साथ ही यह कदम चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।