Friday, 13 March 2026

मिर्धा परिवार में 150 गज जमीन को लेकर टकराव, समाधि स्थल पर आमने-सामने आए ज्योति और मनीष मिर्धा


मिर्धा परिवार में 150 गज जमीन को लेकर टकराव, समाधि स्थल पर आमने-सामने आए ज्योति और मनीष मिर्धा

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जोधपुर। नागौर के प्रभावशाली मिर्धा परिवार में 150 वर्ग गज जमीन को लेकर विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। जोधपुर के चौपासनी रोड स्थित सूंथला के मिर्धा फार्म हाउस में बने पारिवारिक समाधि स्थल को लेकर पूर्व सांसद डॉ. ज्योति मिर्धा और उनके चचेरे भाई मनीष मिर्धा आमने-सामने आ गए हैं। मामला अब सिर्फ पारिवारिक नहीं रहा, बल्कि सोशल मीडिया और पुलिस कार्रवाई तक पहुंच गया है।

विवाद की शुरुआत 15 जनवरी की रात हुई, जब मनीष मिर्धा ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट लिखते हुए आरोप लगाया कि उन्हें अपने पिता की समाधि बनाने से रोका जा रहा है। इसके अगले ही दिन 16 जनवरी को ज्योति मिर्धा ने सोशल मीडिया पर लंबा जवाब देते हुए इसे जमीन कब्जाने की साजिश बताया।

मनीष मिर्धा का आरोप— पिता की समाधि बनाने से रोका गया

मनीष मिर्धा ने लिखा कि उन्होंने अपने पिता स्व. भानु प्रकाश मिर्धा की समाधि का निर्माण उसी पारिवारिक समाधि स्थल पर शुरू कराया, जहां पहले से उनकी परदादी गोगी देवी (1982), बड़े भाई रवि मिर्धा (1987) और दादा नाथूराम मिर्धा (1996) की समाधियां मौजूद हैं। उनका आरोप है कि पुलिस ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य यह कहते हुए रुकवा दिया कि यह जमीन ज्योति मिर्धा की निजी संपत्ति है।

मनीष का दावा है कि 2004 के पारिवारिक बंटवारे में यह तय हुआ था कि समाधि स्थल दोनों परिवारों के लिए साझा रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इसके बदले दोगुनी जमीन देने का प्रस्ताव रखा गया था, जिसे ज्योति मिर्धा और उनकी मां वीणा मिर्धा ने यह कहते हुए ठुकरा दिया था कि वे समाधि के बदले जमीन नहीं लेंगी।

ज्योति मिर्धा का पलटवार— अंतिम संस्कार जहां, समाधि वहीं

विदेश में मौजूद ज्योति मिर्धा ने सोशल मीडिया पोस्ट में मनीष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि 2004 के बंटवारे के समय भानु प्रकाश मिर्धा और मनीष ने स्वयं समाधि स्थल को बहनों के हिस्से में रखने पर सहमति दी थी। उन्होंने कहा कि मनीष ने अपने पिता का अंतिम संस्कार अपनी खातेदारी जमीन में किया, लेकिन अब समाधि उनकी जमीन पर बनाना चाहते हैं।

ज्योति मिर्धा ने लिखा कि हिंदू संस्कारों में जहां अंतिम संस्कार होता है, समाधि भी वहीं बनाई जाती है। उन्होंने इसे राजनीतिक लाभ लेने और मुद्दा उछालने का प्रयास बताया। उन्होंने यह भी कहा कि जब उनकी दादी का निधन हुआ, तब मनीष की ओर से कोई आपत्ति नहीं की गई थी।

150 गज समाधि स्थल बना विवाद की जड़

इस पूरे विवाद के केंद्र में फार्म हाउस के भीतर स्थित 150 वर्ग गज का समाधि स्थल है। मनीष मिर्धा पक्ष का आरोप है कि यह बेशकीमती जमीन बिक्री में बाधा बन रही है, इसलिए समाधि स्थल को हटाने की कोशिश की जा रही है। वहीं, शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि मनीष ने दबंगई दिखाते हुए जमीन पर कब्जा करने की नीयत से तोड़फोड़ की।

इतिहास की बात करें तो इस स्थल पर सबसे पहले 1982 में नाथूराम मिर्धा की मां की समाधि बनी थी, इसके बाद 1987 में रवि मिर्धा और 1996 में स्वयं नाथूराम मिर्धा की समाधि यहीं बनाई गई। अब मनीष अपने पिता की समाधि इसी स्थान पर बनाना चाहते हैं।

पुलिस केस भी दर्ज

मामला तब और गंभीर हो गया, जब 14 जनवरी को ज्योति मिर्धा के केयरटेकर प्रेम प्रकाश ने प्रतापनगर थाने में मनीष मिर्धा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। एफआईआर में आरोप लगाया गया कि मनीष 10-12 लोगों के साथ फार्म हाउस में घुसे, चौकीदार को धमकाया, चाबियां छीनीं और समाधि स्थल में तोड़फोड़ की।

फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर अड़े हुए हैं। एक ओर मनीष मिर्धा इसे पिता के प्रति बेटे का फर्ज बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ज्योति मिर्धा इसे कानून और मालिकाना हक का उल्लंघन करार दे रही हैं। मामला अब प्रशासन और न्यायिक प्रक्रिया के अगले कदम पर टिका है।

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