



जयपुर। राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव ओबीसी आयोग की रिपोर्ट नहीं मिलने के कारण अटक गए हैं। इस मुद्दे पर राज्य निर्वाचन आयोग ने सरकार को चेतावनी देते हुए पंचायतीराज विभाग को पत्र लिखा है।
राज्य निर्वाचन आयोग ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट और राजस्थान हाईकोर्ट के आदेशों के अनुसार 15 अप्रैल 2026 तक पंचायतीराज चुनाव अनिवार्य रूप से कराए जाने हैं। यदि तय समय में चुनाव नहीं कराए गए और अदालत की ओर से अवमानना की कार्रवाई होती है, तो इसकी जिम्मेदारी पंचायतीराज विभाग के अधिकारियों की होगी। राज्य निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन अधिकारी राजेश वर्मा ने पत्र में बताया कि पंचायतीराज संस्थाओं में ओबीसी आरक्षण वाले वार्डों की सूची और रिपोर्ट अब तक आयोग को नहीं मिली है, जिसके कारण चुनाव कार्यक्रम की घोषणा नहीं हो पा रही है।
राज्य निर्वाचन आयोग ने पत्र में यह भी सुझाव दिया है कि यदि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट समय पर उपलब्ध नहीं होती है तो भी चुनाव कराने का कानूनी विकल्प मौजूद है। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2022 में सुरेश महाजन बनाम मध्यप्रदेश सरकार मामले में दिए गए फैसले का हवाला देते हुए कहा है कि यदि ओबीसी आरक्षण के लिए आवश्यक ‘ट्रिपल टेस्ट’ पूरा नहीं होता है, तो अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों को छोड़कर बाकी पदों को सामान्य श्रेणी में अधिसूचित किया जा सकता है। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम घोषित कर सकता है।
राज्य निर्वाचन आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि चुनाव करवाने की लगभग सभी प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। राज्य निर्वाचन आयोग 25 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची जारी कर चुका है। इसके अलावा ईवीएम और बैलेट बॉक्स की व्यवस्था, मशीनों का अपडेट और चुनाव कर्मियों की ट्रेनिंग भी पूरी हो चुकी है। अब केवल वार्डों के आरक्षण संबंधी रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट मिलते ही राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर सकता है।