Thursday, 15 January 2026

प्रशासन से सहमति के बाद जयपुर कूच वापस, नागौर में हनुमान बेनीवाल का आंदोलन स्थगित


प्रशासन से सहमति के बाद जयपुर कूच वापस, नागौर में हनुमान बेनीवाल का आंदोलन स्थगित

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नागौर। आरएलपी के सुप्रीमो नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल और जिला प्रशासन के बीच बुधवार सुबह सहमति बनने के बाद जयपुर कूच का फैसला वापस ले लिया गया। इसके साथ ही रियांबड़ी और मेड़ता क्षेत्र की विभिन्न मांगों को लेकर शुरू किया गया आंदोलन फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। मंगलवार शाम सांसद बेनीवाल हजारों किसानों और समर्थकों के साथ जयपुर की ओर रवाना हुए थे, लेकिन प्रशासन के आग्रह पर काफिला नागौर–अजमेर सीमा स्थित बाढी घाटी में देर रात रोक दिया गया।

रात करीब 11:30 बजे अजमेर रेंज के आईजी राजेंद्र सिंह, नागौर जिला कलेक्टर अरुण कुमार पुरोहित और एसपी मृदुल कच्छावा मौके पर पहुंचे और प्रतिनिधिमंडल से वार्ता की। कुछ बिंदुओं पर सहमति नहीं बन पाई, जिसके बाद बुधवार सुबह करीब 5 बजे दोबारा बातचीत हुई और इस बार वार्ता सफल रही। सांसद हनुमान बेनीवाल ने बताया कि प्रशासन ने छह प्रमुख मांगों पर लिखित सहमति दी है। बजरी माफिया के खिलाफ कार्रवाई के लिए एक दिन में सर्वे शुरू किया जाएगा और दो–तीन दिन में प्रक्रियाएं पूरी करने का आश्वासन दिया गया है। किसानों के मुआवजे सहित अन्य मांगों पर भी त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिलाया गया।

प्रशासन के समक्ष रखी गई प्रमुख मांगें

वार्ता के दौरान बजरी माफियाओं के खिलाफ ड्रोन सर्वे और मैनुअल जांच कर सख्त कार्रवाई व भारी जुर्माना लगाने की मांग की गई। डेगाना एसडीएम, डेगाना डीएसपी और माइनिंग इंजीनियर राकेश शेषमा सहित कुछ अधिकारियों को पद से हटाने व निलंबन की मांग रखी गई। मेड़ता और रियां क्षेत्र के उन गांवों को आपदा राहत में शामिल करने की मांग भी उठी, जिन्हें पिछले वर्ष का मुआवजा अब तक नहीं मिला। इसके अलावा एसडीएम द्वारा कथित तौर पर 14 हजार बीघा गोचर भूमि के गलत आवंटन के मामले में सख्त कार्रवाई की मांग पर भी प्रशासन ने लिखित सहमति दी है।

पूरे घटनाक्रम का क्रम

किसानों की मांगों पर प्रशासन की कथित टालमटोल से आंदोलन तेज हुआ। प्रशासन द्वारा मांगी गई दो दिन की मोहलत खत्म होने के बाद मंगलवार को रियां बड़ी में बड़ी संख्या में किसान जुटे। धरना स्थल पर पहुंचे सांसद बेनीवाल ने प्रशासन पर कागजी खानापूर्ति का आरोप लगाया और आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया। उन्होंने किसानों से पादु कलां थाने के सामने हाईवे कूच का आह्वान किया। इसके बाद किसानों के साथ काफिला पहले पादु कलां, फिर अजमेर संभागीय आयुक्त कार्यालय और अंततः जयपुर कूच के निर्णय तक पहुंचा। करीब 2000 गाड़ियों के काफिले के साथ जयपुर रवाना हुए आंदोलन को अब प्रशासन से सहमति बनने के बाद समाप्त कर दिया गया है।

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