



जयपुर। देश की पिंक सिटी जयपुर में आयोजित “जूनियर मिस इंडिया सीजन-4” का ग्रैंड फिनाले भव्य और यादगार रहा। भारत के 25 राज्यों से आई 175 बालिकाओं ने अपने-अपने राज्यों की सांस्कृतिक विरासत, आत्मविश्वास और फैशन का शानदार प्रदर्शन किया। माय सिटी इवेंट्स इंडिया कॉरपोरेशन द्वारा आयोजित इस राष्ट्रीय मंच ने 5 से 16 वर्ष की बालिकाओं को महिला सशक्तिकरण, लैंगिक समानता और राष्ट्रप्रेम के संदेश के साथ रैंप पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दिया। राष्ट्रीय बालिका उत्सव के तहत क्लार्क्स आमेर होटल में हुए इस आयोजन के लिए देशभर से हजारों ऑडिशन हुए, जिनमें से पाँच आयु-श्रेणियों में 175 प्रतिभागियों का चयन ग्रैंड फिनाले के लिए किया गया।
आयोजकों के अनुसार, चार महीनों की ऑनलाइन-ऑफलाइन ट्रेनिंग के बाद फिनाले आयोजित हुआ। सरबजीत सिंह (फाउंडर, जूनियर मिस इंडिया) ने बताया कि सीजन-4 अब तक का सबसे बड़ा सीजन रहा। निर्णायक मंडल में उन्नति सिंह, अपरा कुच्छल, अलोक श्रीवास्तव, सेफाली सूद, जयदीप सिंह, शोभा गोरी, प्रशांत चौबे, रीवा अरोरा सहित कई प्रतिष्ठित नाम शामिल रहे। जजों ने हर राउंड में प्रतिभागियों के आत्मविश्वास, व्यक्तित्व, संस्कृति और नेतृत्व क्षमता का सूक्ष्म मूल्यांकन किया।
5–7 वर्ष: विजेता सभ्य भुजेल | फर्स्ट रनर-अप सुहानी नंदी | सेकंड रनर-अप ब्लॉसम ई.
8–10 वर्ष: विजेता आरोही चटर्जी | फर्स्ट सान्वी निनावे | सेकंड चार्वी गढ़वी
11–12 वर्ष: विजेता कनक भगतकार | फर्स्ट ताश्या बनर्जी | सेकंड सौरज्या अधिकार
13–14 वर्ष: विजेता राज लाखी बोरुह | फर्स्ट देबाश्मिता घोष | सेकंड पूर्वी बिरादर
14–16 वर्ष: विजेता प्रिंसीप्रिया भौमिक | फर्स्ट सवैया अहीर | सेकंड श्रेष्ठा गुप्ता
5–7 वर्ष: नेयशा | अधीरा शर्मा | स्वनंदी बिहार
8–10 वर्ष: वीरा बैंग | मधुपर्णा | सानवी पानी
11–12 वर्ष: विहारिका बंग | राजलक्ष्मी फुकन | लास्य संजय
13–14 वर्ष: यशो कृष्ण | गार्गी ओन्टेन | पूर्वी बिरादर/अदविता
15–16 वर्ष: श्रेया कुंडू | प्रिंसीप्रिया भोमिक | अदिति रजक
आयोजन के तहत चयनित प्रतिभागियों को विशेष ग्रूमिंग व लीडरशिप ट्रेनिंग दी गई। साथ ही, कार्यक्रम में मुंबई की 15 युवा बालिकाओं को भारतीय युवा सेलिब्रिटी इन्फ्लुएंसर एवं प्रेरणा पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जो अपनी रचनात्मकता, नेतृत्व और सामाजिक प्रभाव के लिए जानी जाती हैं। जूनियर मिस इंडिया का उद्देश्य बालिकाओं में आत्म-विश्वास, संस्कृति-बोध और नेतृत्व के गुण विकसित कर उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच के लिए तैयार करना है।