



पूर्व जलदाय मंत्री और कांग्रेस नेता महेश जोशी के खिलाफ जल जीवन मिशन घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग का मुकदमा चलाने का रास्ता साफ हो गया है। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत प्रारंभिक तौर पर अपराध प्रमाणित पाए जाने पर अभियोजन स्वीकृति प्रदान कर दी है। कानून के अनुसार, ऐसे मामलों में अभियोजन के लिए राज्यपाल की मंजूरी आवश्यक होती है। लोकभवन से जारी बयान के अनुसार, महेश जोशी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी धाराओं और प्रकरण के तथ्यों के आधार पर जो भी अभियोजन बनते हैं, उनके लिए अदालत में मुकदमा चलाने की अनुमति दी गई है। इससे पहले जल जीवन मिशन घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा अलग-अलग प्रकरण दर्ज किए जा चुके हैं। राज्यपाल की स्वीकृति के बाद अब ईडी और एसीबी, दोनों मामलों में अदालत में पृथक-पृथक मुकदमे चल सकेंगे। ईडी ने महेश जोशी के खिलाफ करीब 900 करोड़ रुपये के जल जीवन मिशन घोटाले में मामला दर्ज किया था और उन्हें 24 अप्रैल 2025 को गिरफ्तार किया गया था। इस प्रकरण में वे लगभग सात महीने जेल में रहे। 26 अगस्त 2025 को हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की। पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट से उन्हें जमानत मिली थी। वर्तमान में महेश जोशी जमानत पर हैं।900 करोड़ के घोटाले में सात महीने जेल, फिलहाल जमानत पर