Wednesday, 04 February 2026

सुप्रीम कोर्ट ने पंचायत चुनाव का रास्ता किया साफ, 15 अप्रैल 2026 तक पूरी होगी चुनाव प्रक्रिया


सुप्रीम कोर्ट ने पंचायत चुनाव का रास्ता किया साफ, 15 अप्रैल 2026 तक पूरी होगी चुनाव प्रक्रिया

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सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश में पंचायत चुनाव कराने का रास्ता साफ कर दिया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि पंचायत चुनाव की पूरी प्रक्रिया तय समयसीमा के अनुसार 15 अप्रैल 2026 तक पूरी की जाए। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाला बागची की खंडपीठ ने राजस्व ग्राम सिंहानिया सहित अन्य गांवों के निवासियों द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) को खारिज करते हुए यह आदेश दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जब परिसीमन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और चुनावी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, तो इस स्तर पर न्यायालय का हस्तक्षेप न तो उचित है और न ही व्यावहारिक। अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव कार्यक्रम को प्रभावित करने वाला कोई भी हस्तक्षेप व्यापक असर डाल सकता है।

याचिकाकर्ताओं ने राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ के 14 नवंबर 2025 के फैसले को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में परिसीमन की प्रक्रिया 31 दिसंबर 2025 तक पूरी करने और ग्राम पंचायत एवं निकाय चुनाव एक साथ 15 अप्रैल 2026 तक कराने के निर्देश दिए थे। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि परिसीमन के तहत उनके गांवों को दूरस्थ ग्राम पंचायतों से जोड़ा गया है, जिससे दुर्गम भौगोलिक स्थिति, सड़क संपर्क की कमी और दूरी संबंधी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन होता है। इससे स्थानीय निवासियों को पंचायत मुख्यालय तक पहुंचने में प्रशासनिक और व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।

राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवमंगल शर्मा ने अदालत को बताया कि हाईकोर्ट के निर्देशानुसार परिसीमन की पूरी प्रक्रिया 31 दिसंबर 2025 से पहले ही पूरी कर ली गई है। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूचियों के निर्माण के निर्देश जारी कर दिए हैं और चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। उन्होंने कहा कि परिसीमन केवल दूरी के आधार पर नहीं किया जाता, बल्कि इसमें जनसंख्या, प्रशासनिक सुविधा, सुशासन की आवश्यकता, जिला कलेक्टर स्तर की रिपोर्ट और अंततः राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी जैसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार किया जाता है।

राज्य सरकार ने यह भी दलील दी कि यदि इस स्तर पर परिसीमन में हस्तक्षेप किया गया, तो इसका व्यापक प्रभाव पड़ेगा और प्रदेश की कई ग्राम पंचायतों की सीमाओं में बदलाव करना पड़ेगा, जिससे पूरा चुनाव कार्यक्रम प्रभावित हो सकता है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एसएलपी को खारिज कर दिया और पंचायत चुनाव निर्धारित समय पर कराने का मार्ग प्रशस्त कर दिया।

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