



मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की दूरदर्शी और संवेदनशील पहल से मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना (मा योजना) ने एक नया इतिहास रच दिया है। अब इस योजना के अंतर्गत राजस्थान के पात्र परिवार देश के अन्य राज्यों में भी निःशुल्क और कैशलेस इलाज की सुविधा प्राप्त कर सकेंगे। राज्य सरकार द्वारा लागू की गई आउटबाउंड पोर्टेबिलिटी के बाद योजना का दायरा पूरे देश में फैल गया है, जिससे गंभीर रोगियों को बेहतर और उन्नत उपचार विकल्प मिल सकेंगे।
चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने बताया कि केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) को एकीकृत कर संचालित की जा रही मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना अब यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज की दिशा में मजबूत कदम बन चुकी है। योजना में देश के 30 हजार से अधिक सरकारी और निजी अस्पताल शामिल किए गए हैं, जिससे प्रदेशवासियों को दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों के नामी अस्पतालों में भी इलाज की सुविधा मिलेगी।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि पहले गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को अन्य राज्यों में इलाज के लिए भारी खर्च उठाना पड़ता था। इस पीड़ा को समझते हुए राज्य सरकार ने 19 दिसंबर से आउटबाउंड पोर्टेबिलिटी लागू की, जिसके तहत अब राजस्थान के पात्र परिवार प्रदेश के बाहर भी 25 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज प्राप्त कर सकेंगे।
राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी के सीईओ श्री हरजीलाल अटल के अनुसार, योजना के अंतर्गत अब तक 37 लाख से अधिक मरीजों को 7100 करोड़ रुपये से अधिक का निःशुल्क इलाज दिया जा चुका है। आउटबाउंड पोर्टिबिलिटी शुरू होने के केवल 15 दिनों में ही लगभग 350 मरीजों ने दूसरे राज्यों में उपचार का लाभ लिया है। योजना में करीब 2200 उपचार पैकेज शामिल हैं, जिनमें कैंसर, हृदय रोग, किडनी रोग और अंग प्रत्यारोपण जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज भी शामिल है।
मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के इस विस्तार से राज्य सरकार ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि इलाज के अधिकार में न तो दूरी बाधा बनेगी और न ही आर्थिक स्थिति। यह पहल वास्तव में “इलाज सबके लिए—सब जगह” के संकल्प को साकार करती है।