



दौसा। केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत स्वीकृत विकास कार्यों के शिलान्यास और लोकार्पण कार्यक्रमों में आमंत्रित नहीं किए जाने तथा उद्घाटन पट्टिकाओं पर नाम अंकित नहीं होने से दौसा से कांग्रेस सांसद मुरारीलाल मीना ने स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। कांग्रेस सांसद ने इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष और राजस्थान के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने स्पष्ट रूप से मांग की है कि केंद्रीय निधि से संचालित सभी विकास कार्यों की पट्टिकाओं में सांसद का नाम अनिवार्य रूप से अंकित किया जाए और शिलान्यास एवं लोकार्पण कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों को नियमानुसार आमंत्रित किया जाए।
सांसद की शिकायत के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया है। जिला कलक्टर ने समस्त जिला अधिकारियों को आदेश जारी कर निर्देश दिए हैं कि भविष्य में सभी सरकारी कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित करना सुनिश्चित किया जाए। कलक्टर ने इस बात पर नाराजगी भी व्यक्त की कि प्रशासनिक सुधार एवं समन्वय विभाग द्वारा पूर्व में जारी परिपत्रों के बावजूद इस तरह की शिकायतें सामने आना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार के आदेशों की अवहेलना किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं होगी।
इससे पूर्व कांग्रेस सांसद मुरारीलाल मीना ने बताया कि संसद में मांग उठाने, मंत्रियों से पत्राचार करने और बैठकों के माध्यम से उन्होंने दौसा संसदीय क्षेत्र के लिए कई विकास योजनाएं स्वीकृत करवाई हैं। इसके बावजूद उन योजनाओं के तहत हो रहे कार्यों की उद्घाटन पट्टिकाओं पर उनका नाम नहीं जोड़ा जा रहा और न ही कार्यक्रमों में आमंत्रण भेजा जा रहा है, जो अत्यंत खेदजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर उन लोगों के नाम पट्टिकाओं पर अंकित किए जा रहे हैं, जो केवल लोकसभा या विधानसभा चुनाव के प्रत्याशी रहे हैं, जबकि वर्तमान में वे स्वयं निर्वाचित सांसद हैं। यह न केवल सरकारी प्रोटोकॉल का उल्लंघन है, बल्कि संसदीय मर्यादा और परंपराओं के भी खिलाफ है।
सांसद ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में भी इस प्रकार की लापरवाही जारी रही तो वे अधिकारियों की इस चूक का मामला संसद की विशेष अधिकार समिति के समक्ष उठाने के लिए बाध्य होंगे और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाएगी। उल्लेखनीय है कि हाल ही में गुढ़ाकटला सहित अन्य स्थानों पर हुए लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रमों में केवल भाजपा नेताओं को अतिथि बनाया गया, जबकि सांसद को आमंत्रण तक नहीं भेजा गया। कई स्थानों पर पट्टिकाओं पर चुनाव में पराजित प्रत्याशियों के नाम अंकित होने की बात भी सामने आई है।
विकास कार्यों के कार्यक्रमों में अतिथि चयन को लेकर जिले में राजनीतिक खींचतान खुलकर सामने आ रही है। सूत्रों के अनुसार, सत्तारूढ़ दल भाजपा के नेताओं का दबाव रहता है कि कार्यक्रमों में कांग्रेस नेताओं को आमंत्रित न किया जाए। वहीं, दौसा सांसद और विधायक कांग्रेस से हैं। खासकर दौसा विधानसभा क्षेत्र और जिला मुख्यालय पर होने वाले आयोजनों में राजनीति हावी रहती है। सांसद और विधायक के साथ-साथ सभापति और प्रधान भी कांग्रेस से हैं, जबकि प्रशासनिक स्तर पर तबादलों और सरकार में प्रभाव भाजपा नेताओं का माना जा रहा है। ऐसे में नियमों को दरकिनार कर कांग्रेस से निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को कई कार्यक्रमों में आमंत्रित नहीं किया गया, जिसकी शिकायतें अब उच्च स्तर तक पहुंच गई हैं।
यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले दौसा विधायक दीनदयाल बैरवा भी सरकारी कार्यक्रमों में आमंत्रित नहीं किए जाने का मुद्दा उठा चुके हैं। उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया था कि बूटोली और मूसोलाई में आयोजित स्कूल कार्यक्रमों में उन्हें नजरअंदाज कर भाजपा नेताओं को अतिथि बनाया गया। विधायक ने इसे निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के अधिकारों का हनन बताया था।