Thursday, 15 January 2026

अलवर की ऐतिहासिक सिलीसेढ़ झील को मिला अंतरराष्ट्रीय सम्मान, बनी भारत की 96वीं रामसर साइट


अलवर की ऐतिहासिक सिलीसेढ़ झील को मिला अंतरराष्ट्रीय सम्मान, बनी भारत की 96वीं रामसर साइट

ख़बर सुनिए:

0:00
0:00
Audio thumbnail

अलवर। जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शुमार ऐतिहासिक सिलीसेढ़ झील को द कन्वेंशन ऑन वेटलैंड्स (रामसर कन्वेंशन) ने अंतरराष्ट्रीय महत्व की वेटलैंड घोषित कर दिया है। सिलीसेढ़ अब भारत की 96वीं और राजस्थान की 5वीं रामसर साइट बन गई है। यह घोषणा अलवर सांसद एवं केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से की।

प्रकृति और जैव-विविधता से भरपूर यह झील सारस, किंगफिशर और अनेक प्रवासी पक्षियों के लिए स्वर्ग मानी जाती है। 100 से अधिक पक्षी प्रजातियों की मौजूदगी इसे बर्ड-वॉचिंग के लिए बेहद खास बनाती है। सिलीसेढ़ झील सरिस्का टाइगर रिजर्व का प्रवेश द्वार होने के कारण भी पर्यटकों में लोकप्रिय है।

2014 में थीं 26, अब भारत में 96 रामसर साइट

भूपेंद्र यादव ने कहा कि सिलीसेढ़ झील का रामसर साइट बनना अलवर के लिए गर्व का विषय है। इससे क्षेत्र में पर्यटन, जैव-विविधता संरक्षण, जल सुरक्षा और सतत आजीविका को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में देश में केवल 26 रामसर साइट थीं, जो अब बढ़कर 96 हो चुकी हैं। भारत जल्द ही 100 रामसर साइट के आंकड़े को छूने वाला है।

1845 में रियासतकाल में हुआ था निर्माण

सिलीसेढ़ झील का निर्माण 1845 में महाराजा विनय सिंह ने अलवर शहर को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए कराया था। झील के किनारे स्थित रियासतकालीन महल आज लेक पैलेस होटल के रूप में पर्यटकों को आकर्षित करता है।

क्या होती है रामसर साइट?

रामसर साइट वह वेटलैंड होती है, जिसे अंतरराष्ट्रीय महत्व की मान्यता प्राप्त होती है। यह सूची 1971 के रामसर कन्वेंशन के तहत बनाई गई। किसी भी वेटलैंड को यह दर्जा उसकी जैव-विविधता, दुर्लभ प्रजातियों की मौजूदगी, प्रवासी पक्षियों के आवास और पारिस्थितिक महत्व के आधार पर दिया जाता है।

    Previous
    Next

    Related Posts