



जयपुर। बढ़ते साइबर और ऑनलाइन फ्रॉड को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से साईनाथ चैरिटेबल ट्रस्ट और सद्भावना के सिपाही संगठन ने “थिंक बिफोर यू क्लिक” अभियान की शुरुआत की है। अभियान के जरिए लोगों से किसी भी अनजान मैसेज, फाइल या लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता जांचने की अपील की गई है।
दोनों संस्थाओं के प्रमुख, समाजसेवी एवं उद्योगपति राजीव अरोड़ा ने कहा कि आज ऑनलाइन फ्रॉड तेजी से बढ़ रहा है और हर दिन हमारे आसपास के लोग आर्थिक ठगी का शिकार हो रहे हैं। ऐसे में डिजिटल सावधानी अब केवल जागरूकता का विषय नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जरूरत बन गई है।
राजीव अरोड़ा ने कहा कि ऑनलाइन ठगी के पीछे सबसे बड़ा कारण मानवीय जिज्ञासा और किसी नई जानकारी या ऑफर को तुरंत जानने की प्रवृत्ति है।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर आने वाले आकर्षक संदेश, फाइलें और लिंक लोगों को तुरंत क्लिक करने के लिए प्रेरित करते हैं। साइबर ठग इसी आदत का फायदा उठाकर लोगों को धोखाधड़ी के जाल में फंसा रहे हैं।
‘थिंक बिफोर यू क्लिक’ अभियान का मुख्य संदेश है कि किसी भी मैसेज, लिंक या फाइल को बिना सत्यापन के न खोलें। राजीव अरोड़ा ने लोगों से अपील की कि यदि किसी परिचित व्यक्ति के नाम से भी कोई संदिग्ध लिंक या फाइल आए तो पहले उससे संपर्क कर पुष्टि करें। भेजने वाले की पहचान और संदेश की सत्यता सुनिश्चित होने के बाद ही आगे की कार्रवाई करें।
अरोड़ा ने कहा कि डिजिटल माध्यमों पर थोड़ी सी सावधानी बड़े आर्थिक नुकसान से बचा सकती है। उन्होंने कहा कि किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से पहले कुछ सेकंड रुककर सोचना और उसकी जांच करना जीवनभर की कमाई को सुरक्षित रखने में मदद कर सकता है।
उन्होंने कहा कि साइबर ठगी से बचाव केवल पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि आम नागरिक की जागरूकता भी इसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
राजीव अरोड़ा ने कहा कि यदि लोग ऑनलाइन गतिविधियों में सतर्कता बरतें और संदिग्ध लिंक, फाइल या मैसेज से दूरी बनाए रखें तो साइबर अपराध के मामलों में कमी लाई जा सकती है। इससे जहां आम लोगों को वित्तीय नुकसान से बचाया जा सकेगा, वहीं साइबर फ्रॉड की शिकायतों को लेकर पुलिस और प्रशासन पर पड़ने वाला अनावश्यक दबाव भी कम होगा।
साईनाथ चैरिटेबल ट्रस्ट और सद्भावना के सिपाही संगठन की ओर से शुरू किए गए अभियान का उद्देश्य डिजिटल सुरक्षा को जन-जागरूकता से जोड़ना है। अभियान के माध्यम से लोगों को यही संदेश दिया जा रहा है कि “क्लिक करने से पहले सोचें, जांचें और सत्यापित करें।” डिजिटल युग में यही सावधानी साइबर ठगी के खिलाफ सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच बन सकती है।