Tuesday, 01 September 2026

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के 20 साल: 14 से 18 जनवरी 2027 तक होगा ऐतिहासिक संस्करण, किताबों-विचारों और संवाद का जश्न


जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के 20 साल: 14 से 18 जनवरी 2027 तक होगा ऐतिहासिक संस्करण, किताबों-विचारों और संवाद का जश्न

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जयपुर। दुनिया के प्रमुख साहित्यिक आयोजनों में शामिल वेदांता प्रस्तुत जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) जनवरी 2027 में अपने ऐतिहासिक 20वें संस्करण के साथ दो दशक की यात्रा का उत्सव मनाएगा। राजस्थान सरकार के सहयोग से फेस्टिवल का आयोजन 14 से 18 जनवरी 2027 तक जयपुर में किया जाएगा। इस बार की थीम “विचारों, कहानियों और संवाद के 20 साल” रखी गई है।

आयोजकों के अनुसार पिछले दो दशकों में जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल लेखकों और पाठकों के वार्षिक सम्मेलन से आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक और सांस्कृतिक मंच के रूप में स्थापित हुआ है। साहित्य के साथ इतिहास, राजनीति, विज्ञान, दर्शन, अर्थशास्त्र, कला, स्वास्थ्य, प्रवासन, लैंगिक अध्ययन और पर्यावरण जैसे विषय भी इसके संवाद का हिस्सा रहे हैं।

8 हजार से ज्यादा लेखक-वक्ता और कलाकार हुए शामिल

फेस्टिवल के आयोजकों के मुताबिक 2006 में इसकी स्थापना के बाद से अब तक 8,000 से अधिक लेखक, वक्ता और कलाकार इसके मंच का हिस्सा बन चुके हैं।

इन वर्षों में फेस्टिवल ने 50 लाख से ज्यादा प्रत्यक्ष दर्शकों का स्वागत किया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म, प्रसारण सहयोगियों और मीडिया नेटवर्क को मिलाकर इसकी अनुमानित पहुंच एक अरब से अधिक लोगों तक बताई गई है।

फेस्टिवल का उद्देश्य साहित्य और विचारों को केवल अकादमिक या प्रकाशन जगत तक सीमित रखने के बजाय व्यापक सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बनाना रहा है।

जयपुर से दुनिया के 15 से ज्यादा संस्करणों तक पहुंचा JLF

जयपुर से शुरू हुई फेस्टिवल की यात्रा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुकी है। अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, स्पेन, ऑस्ट्रेलिया, मध्य पूर्व, मालदीव और आयरलैंड सहित दुनिया के विभिन्न हिस्सों में 15 से अधिक अंतरराष्ट्रीय संस्करण आयोजित किए जा चुके हैं।

आयोजकों का कहना है कि इन आयोजनों के जरिए भारतीय साहित्यिक परंपराओं को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाने के साथ अंतरराष्ट्रीय विचारों को भारतीय दृष्टिकोण से जोड़ने का मंच मिला है।

फेस्टिवल का दावा है कि भारत और दुनिया में होने वाले 300 से अधिक साहित्यिक कार्यक्रमों और फेस्टिवल्स ने खुले साहित्यिक संवाद की उस संस्कृति से प्रेरणा ली है, जिसे विकसित करने में JLF ने भूमिका निभाई।

नोबेल और बुकर विजेताओं से लेकर राष्ट्राध्यक्ष तक हुए शामिलदो दशक की यात्रा के दौरान जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में साहित्य, संस्कृति और सार्वजनिक जीवन से जुड़ी कई प्रमुख हस्तियां शामिल हुई हैं।इनमें नोबेल पुरस्कार विजेता, बुकर पुरस्कार विजेता, राष्ट्राध्यक्ष, अर्थशास्त्री, दार्शनिक, कलाकार और वैश्विक विचारक शामिल रहे हैं।

राजस्थान सरकार के सहयोग को बताया महत्वपूर्ण

आयोजकों ने फेस्टिवल की यात्रा में राजस्थान सरकार के सहयोग को महत्वपूर्ण बताया है। उनके अनुसार राज्य की ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक वातावरण ने JLF को अलग पहचान देने में अहम भूमिका निभाई।

फेस्टिवल ने भी जयपुर और राजस्थान को वैश्विक साहित्यिक मानचित्र पर प्रमुख पहचान दिलाने में योगदान दिया है। हर साल देश-दुनिया से लेखक, विचारक, कलाकार और पाठक जयपुर पहुंचते हैं।

22 आधिकारिक भाषाओं में जारी की 20वीं वर्षगांठ की घोषणा

JLF ने अपनी 20वीं वर्षगांठ के अवसर पर भाषाई विविधता को भी प्रमुखता दी है। फेस्टिवल की घोषणा भारत की सभी 22 आधिकारिक भाषाओं में एक साथ जारी की गई है।

आयोजकों के अनुसार इन दो दशकों में भारतीय और अंतरराष्ट्रीय भाषाओं के लेखकों को मंच देने, अनुवाद संस्कृति को बढ़ावा देने और अलग-अलग भाषाओं के बीच संवाद स्थापित करने पर लगातार काम किया गया है। बहुभाषी सत्रों और अनुवाद केंद्रित चर्चाओं के जरिए क्षेत्रीय साहित्य और भाषाई परंपराओं को बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।

‘किताबों और विचारों में लोगों को साथ लाने की ताकत’

टीमवर्क आर्ट्स के प्रबंध निदेशक और जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के निर्माता संजॉय के. रॉय ने कहा कि पिछले 20 वर्षों से फेस्टिवल इस विश्वास पर कायम है कि किताबों और विचारों में लोगों को एक साथ लाने की शक्ति होती है।

उन्होंने कहा कि लेखकों, दर्शकों और अलग-अलग भाषाओं एवं संस्कृतियों के बीच संवाद की प्रतिबद्धता ने इस फेस्टिवल को उसकी मौजूदा पहचान दी है।

नमिता गोखले बोलीं- भारत की आत्मा उसकी भाषाई विविधता में

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल की सह-निदेशक नमिता गोखले ने कहा कि भारत की आत्मा उसकी साहित्यिक विरासत और भाषाई विविधता में बसती है। उन्होंने कहा कि फेस्टिवल अपने ऐतिहासिक 20वें साल में भाषा स्वरमाला श्रृंखला के माध्यम से अनेक भाषाओं और साहित्यिक परंपराओं का उत्सव मना रहा है।

तीसरे दशक में प्रवेश करेगा JLF

टीमवर्क आर्ट्स की प्रमुख प्रीता सिंह ने कहा कि फेस्टिवल की दो दशक की यात्रा लेखकों और दर्शकों के साथ साझेदारों, प्रायोजकों और संस्थानों के सहयोग से संभव हुई है।

उनके अनुसार तीसरे दशक में फेस्टिवल का उद्देश्य नए दर्शकों तक पहुंच बनाना, साहित्य और सार्वजनिक विमर्श को समर्थन देने वाली साझेदारियों को बढ़ाना तथा मंच को स्वतंत्र, समावेशी और वैश्विक रूप से प्रासंगिक बनाए रखना है।

14 से 18 जनवरी तक जयपुर बनेगा साहित्य का वैश्विक मंच

राजस्थान सरकार के सहयोग से होने वाला 20वां जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 14 से 18 जनवरी 2027 तक आयोजित होगा। इसमें साहित्य, संस्कृति, शिक्षा और कला जगत की प्रमुख आवाजों के एक मंच पर आने की उम्मीद है।

अपने तीसरे दशक में प्रवेश करते हुए JLF का फोकस पीढ़ियों, भाषाओं और भौगोलिक सीमाओं के पार साहित्य और विचारों को अधिक सुलभ और सहभागी बनाने पर रहेगा।

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