



जयपुर। जयपुर नगर निगम चुनाव में कांग्रेस की टिकट रणनीति इस बार कई मायनों में अलग नजर आ रही है। पार्टी ने एक तरफ जेन-Z और युवा चेहरों को बड़ी संख्या में मौका दिया है, तो दूसरी तरफ पुराने राजनीतिक परिवारों, नेताओं के परिजनों और पूर्व पार्षदों के परिवार के सदस्यों को भी टिकट दिए हैं। पिछले चुनावों में बागी होकर निर्दलीय मैदान में उतरे कई नेताओं को भी इस बार पार्टी ने अधिकृत प्रत्याशी बनाया है।
कांग्रेस की 150 वार्डों की सूची में पहली बार चुनाव लड़ने वाले युवा चेहरों से लेकर दशकों से राजनीति में सक्रिय वरिष्ठ नेताओं तक को जगह मिली है। कई महिला आरक्षित वार्डों में पिछले चुनाव में पार्षद रहे या टिकट मांग रहे नेताओं की जगह उनकी पत्नियों और परिवार की महिलाओं को मैदान में उतारा गया है।
कांग्रेस ने इस चुनाव में युवाओं को टिकट देने पर खास जोर दिया है। वार्ड 3 से यूथ कांग्रेस नेता छगन कुलदीप को पहली बार मौका दिया गया है। वार्ड 43 से पूर्व यूथ कांग्रेस प्रदेश महासचिव और जिला कांग्रेस प्रवक्ता आशीष शर्मा, वार्ड 61 से पूर्व NSUI प्रदेश सचिव सुरेश मीणा और वार्ड 74 से NSUI-यूथ कांग्रेस में सक्रिय रहे विचार व्यास को टिकट दिया गया है।
वार्ड 88 से श्रुति भारद्वाज को जेन-Z चेहरे के तौर पर पहली बार टिकट दिया गया है, जबकि वार्ड 95 से मानवेंद्र सिंह को भी जेन-Z उम्मीदवार के तौर पर मौका मिला है। वार्ड 107 से बैंकर खुशबू शर्मा, वार्ड 126 से NSUI और यूथ कांग्रेस से जुड़ी सोफिया बानो, वार्ड 127 से बादल शर्मा और वार्ड 130 से यूथ कांग्रेस में सक्रिय आदित्य कौशिक को युवा चेहरों के तौर पर उतारा गया है।
पार्टी ने पिछले चुनाव में बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले कई नेताओं को भी इस बार संगठन के टिकट पर मैदान में उतारा है। वार्ड 2 से मनिराज सिंह, वार्ड 13 से धनराज सिनोदिया, वार्ड 21 से राकेश लाटा, वार्ड 27 से कालूराम यादव और वार्ड 30 से रवीन बुडानिया पिछले चुनाव में बागी या निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतर चुके हैं। इस बार कांग्रेस ने इन्हें अधिकृत उम्मीदवार बनाया है। वार्ड 114 से मोहम्मद जकरिया शेरम को भी टिकट दिया गया है, जो पिछली बार बागी निर्दलीय पार्षद रहे थे।
कांग्रेस की सूची में परिवार के भीतर टिकट शिफ्ट करने के कई उदाहरण भी हैं। वार्ड 7 से पूर्व पार्षद प्रदीप तिवाड़ी की जगह महिला आरक्षण के कारण उनकी पत्नी पूनम तिवाड़ी को टिकट दिया गया है। वार्ड 20 में पिछले चुनाव में चुनाव लड़ चुके अजय सैनी की पत्नी मोनिका सैनी को टिकट मिला है।
वार्ड 58 में पूर्व पार्षद कमल वाल्मीकि की जगह उनकी मां रामप्यारी देवी, वार्ड 110 में निवर्तमान पार्षद अरविंद मेठी की जगह पत्नी सुनीता मेठी, वार्ड 116 में वरिष्ठ पार्षद उमरदराज की पत्नी संजीदा, और वार्ड 125 में पिछले चुनाव में जीते रईस की जगह पत्नी मंजू बानो को टिकट दिया गया है।
कांग्रेस नेता हरीश यादव की पुत्रवधू प्रियंका यादव को वार्ड 33 से पहली बार उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं बगरू क्षेत्र के वार्ड 72 से सुमन रमेश भाटी को टिकट मिला है। उनके पति रमेश भाटी NSUI के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं और सुमन स्वयं NGO से जुड़ी रही हैं।
वार्ड 142 से मीना डंडोरिया को टिकट दिया गया है। वे कांग्रेस नेता और सफाई कर्मचारी आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष दीपक डेडोरिया की मां हैं।
इसके अलावा कई ऐसे प्रत्याशी भी हैं जिनके पति, पिता, सास-ससुर या अन्य परिजन पहले पार्षद रहे हैं या कांग्रेस संगठन में सक्रिय पदों पर रहे हैं।
कांग्रेस ने राजनीति से बाहर के पेशेवर और प्रशासनिक पृष्ठभूमि वाले चेहरों को भी मौका दिया है। झोटवाड़ा क्षेत्र के वार्ड 31 से जयकुमार जैन को प्रत्याशी बनाया गया है। वे राजस्थान विधानसभा के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और पहली बार पार्षद का चुनाव लड़ रहे हैं।
वार्ड 35 से अनिल माथुर को उम्मीदवार बनाया गया है। वे हाईकोर्ट कर्मचारी संघ के पूर्व पदाधिकारी रहे हैं और लंबे समय से कांग्रेस से जुड़े बताए गए हैं।
वार्ड 19 से कांग्रेस ने फारुख खान को मैदान में उतारा है। वे सेना से सेवानिवृत्त हैं और वर्तमान में सिक्योरिटी एजेंसी चलाते हैं। सूची में उन्हें कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के विधानसभा क्षेत्र के गनेड़ी गांव का निवासी और उनके नजदीकी के तौर पर बताया गया है।
कांग्रेस ने अनुभवी नेताओं को पूरी तरह किनारे नहीं किया है। वार्ड 118 से वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पार्षद सुनीता महावर को फिर टिकट दिया गया है। वे पिछले नगर निगम कार्यकाल में मेयर पद की दावेदार भी रही थीं।
वार्ड 131 से दो बार पार्षद रह चुके पुष्पेंद्र मीणा को तीसरी बार टिकट मिला है, जबकि वार्ड 137 से पिछली बार जीते सलमान मंसूरी को दोबारा मौका दिया गया है।
सिविल लाइंस विधानसभा क्षेत्र से जुड़े वार्डों में कांग्रेस ने पुराने पार्षदों या पहले चुनाव हार चुके चेहरों के बजाय बड़े पैमाने पर नए उम्मीदवारों को अवसर दिया है। इससे साफ है कि पार्टी कुछ क्षेत्रों में पुरानी टीम बदलकर नई स्थानीय लीडरशिप तैयार करने की रणनीति पर काम कर रही है।
वहीं हवामहल, किशनपोल और सांगानेर जैसे क्षेत्रों में पुराने राजनीतिक परिवारों और संगठन से लंबे समय से जुड़े लोगों को भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया गया है।
कांग्रेस की जयपुर नगर निगम सूची से यह संकेत मिलता है कि पार्टी ने केवल एक फॉर्मूले पर टिकट नहीं बांटे हैं। कहीं जेन-Z और पहली बार चुनाव लड़ रहे युवाओं पर भरोसा किया गया है, कहीं पुराने पार्षदों को दोबारा मौका मिला है और कई वार्डों में मजबूत राजनीतिक परिवारों के सदस्यों को टिकट दिया गया है।
अब चुनावी नतीजे बताएंगे कि युवा चेहरों, पुराने संगठनात्मक नेटवर्क और राजनीतिक परिवारों का यह मिश्रण कांग्रेस के लिए कितना प्रभावी साबित होता है।