Monday, 31 August 2026

टोंक में भाजपा को झटका: पूर्व सभापति लक्ष्मी जैन ने नहीं भरा नामांकन, वार्ड 23 की जगह 36 से टिकट मिलने पर जताई नाराजगी


टोंक में भाजपा को झटका: पूर्व सभापति लक्ष्मी जैन ने नहीं भरा नामांकन, वार्ड 23 की जगह 36 से टिकट मिलने पर जताई नाराजगी

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टोंक। नगर परिषद चुनाव में टिकट वितरण के बाद भाजपा के भीतर असंतोष का एक और मामला सामने आया है। नगर परिषद टोंक की पूर्व सभापति लक्ष्मी देवी जैन ने पार्टी की ओर से चुनाव लड़ने का अवसर दिए जाने के बावजूद अपना नामांकन दाखिल नहीं किया। लक्ष्मी जैन वार्ड नंबर 23 से टिकट मांग रही थीं, लेकिन अंतिम समय में उन्हें वार्ड नंबर 36 से चुनाव लड़ने के लिए कहा गया। इसके बाद उन्होंने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया।

भाजपा ने वार्ड 23 से पूर्व जिलाध्यक्ष श्यामलाल जैन की पुत्रवधू आशा जैन को प्रत्याशी बनाया है। लक्ष्मी जैन लंबे समय तक इसी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और उनके मुताबिक वे करीब 12 वर्षों तक वार्ड 23 से पार्षद रही हैं। इसी आधार पर उन्होंने पार्टी नेतृत्व के सामने इसी वार्ड से अपनी दावेदारी रखी थी।

नामांकन से करीब एक घंटे पहले वार्ड 36 से लड़ने को कहा

लक्ष्मी जैन ने बताया कि नामांकन के अंतिम दिन करीब दोपहर 1:30 बजे पार्टी की ओर से उन्हें वार्ड नंबर 36 से चुनाव लड़ने के लिए कहा गया। उनका कहना है कि इससे पहले वे प्रदेश नेतृत्व और टोंक भाजपा जिलाध्यक्ष को स्पष्ट कर चुकी थीं कि वे वार्ड 23 के अलावा किसी दूसरे वार्ड से चुनाव नहीं लड़ेंगी।

उन्होंने कहा कि वार्ड 36 में भाजपा का एक कार्यकर्ता पहले से लंबे समय से चुनाव की तैयारी कर रहा था और वहां किसी अन्य कार्यकर्ता के नाम की घोषणा भी हो चुकी थी। ऐसे में अंतिम समय में वहां जाकर नामांकन दाखिल करना उन्हें उचित नहीं लगा।

‘किसी कार्यकर्ता की महीनों की मेहनत पर अधिकार नहीं जता सकती’

लक्ष्मी जैन ने अपने फैसले को पार्टी कार्यकर्ता के सम्मान से जोड़ते हुए कहा कि जिस व्यक्ति ने महीनों तक किसी वार्ड में मेहनत की हो, अंतिम समय में उसकी दावेदारी को दरकिनार कर स्वयं चुनाव लड़ना उन्हें उचित नहीं लगा।

उन्होंने कहा, “भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ताओं की पार्टी है। मैं किसी ऐसे कार्यकर्ता की मेहनत पर अपना अधिकार नहीं जता सकती, जिसने महीनों से जमीन पर काम किया हो। मेरे लिए पद से अधिक महत्वपूर्ण पार्टी और पार्टी का कार्यकर्ता है।” उनका कहना है कि उन्होंने वार्ड 36 में पहले से काम कर रहे पार्टी कार्यकर्ता और उसकी टीम की मेहनत का सम्मान करते हुए नामांकन नहीं भरने का निर्णय लिया।

वार्ड 23 से 12 साल तक पार्षद रहने का दावा

पूर्व सभापति ने कहा कि वार्ड 23 से उनका लंबे समय का जुड़ाव है। वे करीब 12 वर्षों तक इसी क्षेत्र से पार्षद रहीं और इसी कारण उन्होंने इस चुनाव में भी वार्ड 23 से ही दावेदारी प्रस्तुत की थी।

हालांकि भाजपा ने इस वार्ड से आशा जैन को प्रत्याशी घोषित कर दिया। इसके बाद लक्ष्मी जैन को दूसरे वार्ड से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया गया, जिसे उन्होंने स्वीकार नहीं किया।

स्थानीय नेताओं से ‘विश्वासघात’ के सवाल पर आरोप लगाने से बचीं

टिकट वितरण में स्थानीय स्तर पर कथित गुटबाजी और उनके साथ विश्वासघात किए जाने के सवाल पर लक्ष्मी जैन ने किसी नेता का नाम लेकर आरोप लगाने से इनकार किया।

उन्होंने कहा कि किस स्तर पर क्या हुआ और किसने क्या भूमिका निभाई, इसकी समीक्षा पार्टी संगठन को करनी है। लक्ष्मी जैन ने कहा, “किसने क्या किया और किस स्तर पर क्या हुआ, इसकी जांच पार्टी करेगी। मैं किसी व्यक्ति पर आरोप लगाने के बजाय संगठन के निर्णय और अनुशासन को सर्वोपरि मानती हूं।”

टिकट कटने से भाजपा में कई जगह असंतोष

टोंक नगर परिषद चुनाव में भाजपा के टिकट वितरण के बाद कुछ अन्य दावेदारों में भी नाराजगी सामने आई है। कई पुराने कार्यकर्ताओं और दावेदारों के टिकट कटने के बाद कुछ लोगों ने निर्दलीय नामांकन भी दाखिल किए हैं।

राजनीतिक हलकों में टिकट वितरण के पीछे स्थानीय गुटों की खींचतान की चर्चा है, हालांकि इन आरोपों पर पार्टी की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब भाजपा के सामने बड़ी चुनौती उन कार्यकर्ताओं को मनाने की होगी, जिन्होंने टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया है।

‘पद हो या न हो, जनता की सेवा करती रहूंगी’

लक्ष्मी जैन ने टोंक की जनता का आभार जताते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में उन्हें जो पहचान और सम्मान मिला, वह लोगों के स्नेह की वजह से मिला है।

उन्होंने कहा, “आज मेरे पास कोई पद हो या न हो, टोंक की जनता का स्नेह मेरे लिए सबसे बड़ी पूंजी है। मैं पद के साथ भी जनता की सेवक थी और बिना पद के भी जनता की सेवा के लिए हमेशा उपलब्ध रहूंगी।” उन्होंने कहा कि अब वे पहले से अधिक ऊर्जा के साथ समाज और जनता के बीच काम करेंगी।

‘भाजपा की कार्यकर्ता थी, हूं और आगे भी रहूंगी’

टिकट नहीं मिलने के बावजूद लक्ष्मी जैन ने साफ किया कि वे भाजपा नहीं छोड़ रही हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं से अधिकृत भाजपा प्रत्याशियों के लिए काम करने की अपील की।

लक्ष्मी जैन ने कहा, “मेरी राजनीति किसी पद से शुरू नहीं हुई और किसी टिकट पर समाप्त भी नहीं होगी। पार्टी ने मुझे बहुत कुछ दिया है और टोंक की जनता ने मुझे उससे भी बढ़कर स्नेह दिया है। कार्यकर्ताओं का सम्मान मेरे लिए किसी भी पद से बड़ा है। मैं भाजपा की कार्यकर्ता थी, हूं और आगे भी रहूंगी।”

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