Sunday, 30 August 2026

करौली भाजपा में टिकटों को लेकर बवाल: पूर्व विधायक राजकुमारी जाटव ने दिखाई चप्पल, जिलाध्यक्ष जादौन ने दुपट्टे से गला कसने की कोशिश


करौली भाजपा में टिकटों को लेकर बवाल: पूर्व विधायक राजकुमारी जाटव ने दिखाई चप्पल, जिलाध्यक्ष जादौन ने दुपट्टे से गला कसने की कोशिश

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राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव के टिकट वितरण को लेकर भाजपा के भीतर खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। शनिवार को जयपुर में भरतपुर संभाग के चुनाव प्रभारी अशोक परनामी के आवास पर हुई अहम बैठक के दौरान करौली के नेताओं के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि पूर्व विधायक राजकुमारी जाटव और भाजपा जिलाध्यक्ष गोवर्धन सिंह जादौन आमने-सामने आ गए।

दोनों नेताओं के बीच टिकट के दावेदारों की सूची को लेकर तीखी बहस हुई। विवाद के दौरान एक-दूसरे पर टिकट के बदले पैसे लेने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए। मामला इतना बढ़ा कि राजकुमारी जाटव ने कथित तौर पर चप्पल दिखाई, जबकि गोवर्धन सिंह जादौन ने नाराज होकर भाजपा के दुपट्टे से अपनी गर्दन कसने की कोशिश की। वहां मौजूद नेताओं ने तत्काल उन्हें संभाला।

दावेदारों की सूची को लेकर शुरू हुआ विवाद

जानकारी के अनुसार राजकुमारी जाटव कुछ संभावित प्रत्याशियों की सूची लेकर बैठक में पहुंची थीं। टिकटों पर चर्चा के दौरान जिलाध्यक्ष गोवर्धन सिंह जादौन ने इस सूची पर आपत्ति जताई।

जादौन ने आरोप लगाया कि सूची में शामिल कुछ नामों को कथित रूप से पैसे लेकर आगे बढ़ाया जा रहा है और पुराने तथा लंबे समय से संगठन में काम कर रहे कार्यकर्ताओं के नाम काटे जा रहे हैं। इन आरोपों पर राजकुमारी जाटव ने भी पलटवार किया और जिलाध्यक्ष पर ही टिकटों को लेकर पैसे लेने का आरोप लगा दिया। दोनों पक्षों के आरोप अभी आरोप ही हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

बहस बढ़ी तो चप्पल दिखाने तक पहुंचा मामला

टिकट वितरण को लेकर शुरू हुई बहस कुछ ही देर में काफी तीखी हो गई। आरोप-प्रत्यारोप के बीच माहौल तनावपूर्ण हो गया।

बताया जा रहा है कि गुस्से में राजकुमारी जाटव ने चप्पल तक दिखा दी। इसके बाद गोवर्धन सिंह जादौन भी बेहद नाराज हो गए और उन्होंने भाजपा के दुपट्टे से अपनी गर्दन कसने की कोशिश की। स्थिति बिगड़ती देख वहां मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को शांत कराया।

इस्तीफा देने की भी कही बात

विवाद के दौरान गोवर्धन सिंह जादौन ने जिलाध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की बात भी कही। बैठक में मौजूद वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें समझाया और मामला शांत कराने की कोशिश की। इसके बाद टिकटों को लेकर चर्चा आगे बढ़ाई गई। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब भाजपा पूरे प्रदेश में प्रत्याशी चयन को अंतिम रूप देने में जुटी है और हर वार्ड पर स्थानीय संगठन तथा वरिष्ठ नेताओं से फीडबैक लिया जा रहा है।

परनामी बोले- ऐसा कुछ नहीं हुआ

बैठक में भरतपुर संभाग प्रभारी बिहारीलाल विश्नोई और चुनाव प्रभारी अशोक परनामी भी मौजूद थे। पूरे घटनाक्रम को लेकर अशोक परनामी ने विवाद की बात को खारिज करते हुए कहा कि “ऐसा कुछ नहीं हुआ।” उनके इस बयान के बाद घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।

राजकुमारी जाटव बोलीं- पार्टी के अंदर रखूंगी पक्ष

पूर्व विधायक राजकुमारी जाटव ने मामले पर ज्यादा सार्वजनिक टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि वे इस पूरे प्रकरण को लेकर पार्टी के अंदर अपना पक्ष रखेंगी, बाहर नहीं। इससे संकेत मिलता है कि टिकट चयन को लेकर करौली भाजपा के भीतर मतभेद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं।

टिकट वितरण में बढ़ती अंदरूनी खींचतान

निकाय चुनाव में भाजपा के लिए प्रत्याशी चयन लगातार चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। कई जिलों में टिकट के लिए एक ही वार्ड से कई दावेदार सामने आए हैं। पार्टी नेतृत्व लगातार यह कह रहा है कि टिकट मेरिट, संगठनात्मक सक्रियता और जीत की संभावना के आधार पर दिए जाएंगे। लेकिन स्थानीय स्तर पर समर्थकों के नाम आगे बढ़ाने और पुराने कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देने को लेकर मतभेद सामने आ रहे हैं। करौली का यह विवाद इसी अंदरूनी खींचतान का बड़ा उदाहरण बन गया है।

कार्यकर्ता बनाम सिफारिश का मुद्दा फिर चर्चा में

भाजपा में टिकट वितरण को लेकर पहले भी कई जगह यह सवाल उठ चुका है कि लंबे समय से संगठन में काम करने वाले कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता मिलेगी या प्रभावशाली नेताओं के समर्थकों को।

करौली की बैठक में दावेदारों की सूची को लेकर हुआ विवाद इसी बहस को और तेज कर सकता है। यदि टिकट वितरण के बाद नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं को संतुष्ट नहीं किया गया तो कुछ वार्डों में बगावत और निर्दलीय दावेदारी का खतरा भी बढ़ सकता है।

अब पार्टी नेतृत्व के फैसले पर नजर

अब नजर इस बात पर रहेगी कि भाजपा नेतृत्व इस विवाद को किस तरह संभालता है और करौली के टिकटों पर अंतिम फैसला किसके पक्ष में जाता है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि राजकुमारी जाटव और गोवर्धन सिंह जादौन द्वारा एक-दूसरे पर लगाए गए आरोपों को लेकर पार्टी संगठन कोई आंतरिक जांच या अनुशासनात्मक कदम उठाता है या मामला बातचीत से ही शांत किया जाता है।

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