



जयपुर। राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही भाजपा ने प्रत्याशियों के चयन की कवायद अंतिम चरण में पहुंचा दी है। दोनों प्रमुख दल वार्ड स्तर पर मजबूत और 'जिताऊ चेहरों' को चुनाव मैदान में उतारने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। माना जा रहा है कि भाजपा प्रत्याशियों की पहली सूची 29 अगस्त को जारी कर सकती हैं। पहली सूची में उन वार्डों के प्रत्याशियों के नाम सामने आने की संभावना है, जहां पार्टी स्तर पर सहमति बन चुकी है।
भाजपा ने प्रत्याशी चयन को लेकर गुरुवार को प्रदेश मुख्यालय में लंबी बैठक की। इसमें अजमेर, बीकानेर और उदयपुर संभाग के 17 जिलों की 117 नगरीय निकायों के करीब 3,935 वार्डों में संभावित प्रत्याशियों के नामों पर मंथन किया गया। बैठक दोपहर से शुरू होकर आधी रात तक चली। इस दौरान प्रत्येक वार्ड से मिले दावेदारों के नाम, स्थानीय राजनीतिक समीकरण और संगठन से मिले फीडबैक पर विस्तार से चर्चा की गई।
भाजपा संगठन की ओर से पहले ही वार्ड स्तर पर दावेदारों को लेकर रायशुमारी कराई गई थी। इसके आधार पर कई वार्डों के लिए तीन-तीन संभावित प्रत्याशियों का पैनल तैयार किया गया। प्रदेश मुख्यालय में हुई बैठक में इन नामों को लेकर स्थानीय नेताओं और संगठन पदाधिकारियों से मिले फीडबैक का आकलन किया गया।
बैठक में दावेदार की संगठन में सक्रियता, स्थानीय स्तर पर पकड़, पिछले चुनावों का प्रदर्शन, सामाजिक और जातीय समीकरण तथा संबंधित वार्ड में जीत की संभावना जैसे पहलुओं को प्रत्याशी चयन का प्रमुख आधार बनाया गया।
बताया जा रहा है कि अधिकांश सीटों पर उम्मीदवारों के नाम लगभग तय कर लिए गए हैं। हालांकि आधिकारिक सूची जारी होने के बाद ही यह साफ होगा कि पार्टी ने किस वार्ड से किस प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतारा है।
जिन नगरीय निकायों में प्रत्याशियों के नाम पर सहमति बन चुकी है, वहां चुनावी प्रक्रिया में देरी नहीं हो, इसके लिए पार्टी स्तर पर तैयारी आगे बढ़ा दी गई है। फाइनल किए गए प्रत्याशियों के चुनाव चिन्ह से संबंधित अधिकार और आवश्यक प्रक्रिया निकाय प्रभारियों को सौंपने की तैयारी की गई है।
प्रदेश नेतृत्व की ओर से संबंधित निकाय प्रभारियों को अधिकृत किए जाने के बाद अब सभी की निगाह आधिकारिक प्रत्याशी सूची पर टिकी है। संभावना है कि 29 अगस्त से भाजपा अपने प्रत्याशियों के नाम सार्वजनिक करना शुरू कर सकती है।
प्रत्याशी चयन को भाजपा कितनी गंभीरता से ले रही है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा गुरुवार को दोपहर में बैठक में शामिल होने के बाद रात को दोबारा प्रदेश भाजपा कार्यालय पहुंचे।
मुख्यमंत्री आधी रात के बाद तक बैठक में मौजूद रहे और विभिन्न नगरीय निकायों के प्रत्याशियों को लेकर चल रहे मंथन में हिस्सा लिया। बैठक में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, संगठन महामंत्री अजेय कुमार और चुनाव प्रभारी हरीश द्विवेदी सहित पार्टी के प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे।
भाजपा इस बार केवल संगठनात्मक पद या बड़े नेताओं की सिफारिश के आधार पर टिकट देने के बजाय वार्ड स्तर पर प्रत्याशी की वास्तविक स्थिति का आकलन कर रही है।
टिकट तय करते समय मुख्य रूप से यह देखा जा रहा है कि दावेदार की क्षेत्र में कितनी पकड़ है, स्थानीय कार्यकर्ताओं में उसकी स्वीकार्यता कैसी है और पिछले चुनावों में उसका या उसके समर्थक समूह का प्रदर्शन कैसा रहा है। इसके अलावा वार्ड के सामाजिक समीकरण को भी टिकट वितरण में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी का प्रयास ऐसे उम्मीदवार उतारने का है जो संगठन के वोट बैंक के साथ व्यक्तिगत स्तर पर भी मतदाताओं को अपने पक्ष में जोड़ सकें।
भाजपा की संभागवार बैठकों का दौर अभी जारी रहेगा। 28 अगस्त को भरतपुर और कोटा संभाग के नगरीय निकायों के प्रत्याशियों को लेकर चर्चा प्रस्तावित है।
इसके बाद 29 अगस्त को जयपुर और जोधपुर संभाग के निकायों पर मंथन किया जाएगा। इन बैठकों के बाद प्रदेश के अधिकांश वार्डों में भाजपा प्रत्याशियों की तस्वीर साफ होने की संभावना है।
जयपुर संभाग की बैठक पर विशेष नजर रहेगी, क्योंकि राजधानी जयपुर सहित संभाग के कई बड़े नगरीय निकायों में टिकट के लिए बड़ी संख्या में दावेदार सामने आए हैं। माना जा रहा है कि कांग्रेस भी 29 अगस्त के आसपास अपनी पहली प्रत्याशी सूची जारी कर सकती है। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस की सूची सामने आने के साथ ही प्रदेश में निकाय चुनाव का मुकाबला और स्पष्ट हो जाएगा।
दोनों प्रमुख दलों के लिए प्रत्याशी चयन के साथ टिकट नहीं मिलने वाले दावेदारों को साधना भी बड़ी चुनौती होगी। कई वार्डों में एक ही पार्टी से टिकट के लिए एक से अधिक मजबूत दावेदार सामने आए हैं। ऐसे में सूची जारी होने के बाद कुछ सीटों पर नाराज दावेदार निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला कर सकते हैं। यही कारण है कि राजनीतिक दल टिकट वितरण में संगठनात्मक समीकरण के साथ संभावित बगावत को भी ध्यान में रख रहे हैं।