



जयपुर। राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव को लेकर कांग्रेस ने प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया तेज कर दी है। पार्टी का फोकस ऐसे उम्मीदवारों को मैदान में उतारने पर है, जिनकी अपने वार्ड में मजबूत पकड़ हो और जीत की संभावना सबसे ज्यादा हो। इसी रणनीति के तहत प्रदेश कांग्रेस ने टिकट चयन की कवायद को अंतिम चरण में पहुंचा दिया है।
प्रदेश कांग्रेस वॉररूम में गुरुवार को सुबह से देर रात तक जिलेवार बैठकों का दौर चला। इन बैठकों में जिलों और विधानसभा क्षेत्रों में भेजे गए प्रभारियों से संबंधित नगरीय निकायों की जमीनी स्थिति, वार्डवार दावेदारों की ताकत और संभावित चुनावी समीकरणों पर विस्तार से चर्चा की गई।
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस 29 अगस्त से टिकट वितरण की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। पार्टी एक साथ सभी प्रत्याशियों की सूची जारी करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से उम्मीदवारों के नाम घोषित कर सकती है।
बैठक में प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि टिकट की सिफारिश करते समय स्थानीय समीकरणों के साथ प्रत्याशी की जीतने की वास्तविक क्षमता को सबसे अधिक महत्व दिया जाए।
दावेदार की संगठन में सक्रियता, क्षेत्र में पकड़, कार्यकर्ताओं और स्थानीय मतदाताओं के बीच स्वीकार्यता तथा चुनाव जीतने की क्षमता जैसे बिंदुओं को टिकट चयन का प्रमुख आधार बनाया जा रहा है।
कांग्रेस नेतृत्व का जोर इस बात पर है कि केवल संगठन में पद या किसी नेता की सिफारिश टिकट का आधार नहीं बने, बल्कि संबंधित वार्ड में मजबूत और चुनाव जीतने की स्थिति रखने वाले उम्मीदवार को प्राथमिकता दी जाए।
कांग्रेस ऐसे वार्डों की भी अलग से समीक्षा कर रही है, जहां पार्टी के पास फिलहाल कोई मजबूत दावेदार सामने नहीं आया है।
ऐसे वार्डों में पार्टी दूसरे क्षेत्र या आसपास के वार्ड के ऐसे चेहरे को मैदान में उतारने पर भी विचार कर रही है, जिसकी क्षेत्र में अच्छी पहचान और मतदाताओं के बीच प्रभाव हो।
यदि किसी दूसरे वार्ड में सक्रिय दावेदार की किसी कमजोर वार्ड में बेहतर पकड़ और जीत की संभावना दिखाई देती है तो पार्टी उसे वहां से टिकट देने का फैसला भी कर सकती है।
इस रणनीति के जरिए कांग्रेस उन वार्डों में भी मुकाबला मजबूत करना चाहती है, जहां पारंपरिक तौर पर पार्टी की स्थिति कमजोर रही है।
प्रदेश कांग्रेस वॉररूम में आयोजित बैठकों में जिला और विधानसभा क्षेत्रवार प्रभारियों से अलग-अलग फीडबैक लिया गया।
प्रभारियों ने पार्टी नेतृत्व को वार्डों की राजनीतिक स्थिति के साथ प्रमुख दावेदारों की जानकारी दी। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर संभावित विरोध, बगावत और दूसरे दलों के मजबूत उम्मीदवारों को लेकर भी चर्चा की गई। पार्टी नेतृत्व प्रत्येक सीट पर अंतिम निर्णय लेने से पहले स्थानीय स्तर से मिले फीडबैक को प्राथमिकता दे रहा है।