



जयपुर। राजस्थान में शारीरिक शिक्षक (PTI) भर्ती परीक्षा-2022 से जुड़े कथित फर्जी और बैकडेटेड B.P.Ed. डिग्री मामले में SOG की जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। अब जांच केवल संदेह के घेरे में आए 66 अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं है। विश्वविद्यालय के कुलपति समेत तीन अधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद LLB, PhD, इंजीनियरिंग, BCA, MBA, B.Sc. और फिजियोथेरेपी सहित कई अन्य पाठ्यक्रमों के रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में आ गए हैं।
फॉरेंसिक और फाइनेंशियल ऑडिट के दौरान अलग-अलग पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों से जुड़े फीस रिकॉर्ड में कथित विसंगतियां मिलने के बाद SOG यह पता लगाने में जुटी है कि बैकडेट में रिकॉर्ड और डिग्री तैयार करने का मामला केवल B.P.Ed. तक सीमित था या इसका दायरा कहीं अधिक बड़ा है।
राजस्थान SOG के आईजी अजयपाल लांबा के अनुसार जांच में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य फीस लेजर से सामने आए हैं। मूल आरोपी भारमल राम के नाम से विश्वविद्यालय में दो अलग-अलग फीस लेजर अकाउंट मिलने की बात सामने आई है।
फॉरेंसिक जांच में इन खातों की कई प्रविष्टियां बाद की तारीखों में किए जाने के संकेत मिले हैं, जबकि रिकॉर्ड को पुरानी तारीख का दर्शाया गया था। अब SOG इसी रिकॉर्ड की टाइमलाइन का तकनीकी विश्लेषण कर रही है।
जांच में सामने आया कि संबंधित परीक्षा का परिणाम 21 अक्टूबर 2022 को जारी हो चुका था, जबकि फीस से जुड़ी कुछ एंट्री इसके बाद की तारीखों में दर्ज मिलीं। इसी आधार पर जांच एजेंसी यह पता लगा रही है कि संबंधित रिकॉर्ड वास्तव में कब तैयार किए गए, किसके निर्देश पर एंट्री की गई और विश्वविद्यालय के किन अधिकारियों या कर्मचारियों की इसमें भूमिका रही।
फॉरेंसिक और फाइनेंशियल ऑडिट में अन्य पाठ्यक्रमों के फीस रिकॉर्ड में भी विसंगतियों के संकेत मिलने के बाद SOG ने जांच का दायरा बढ़ाया है। अब LLB, PhD, इंजीनियरिंग डिग्री और डिप्लोमा, BCA, MBA, B.Sc. और फिजियोथेरेपी सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों के प्रवेश, फीस और शैक्षणिक रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
SOG की जांच का एक अहम बिंदु यह भी है कि क्या संबंधित शैक्षणिक सत्र समाप्त होने के बाद विद्यार्थियों से फीस लेकर पुराने रिकॉर्ड तैयार किए गए और फिर उन्हीं रिकॉर्ड के आधार पर डिग्री या अन्य शैक्षणिक दस्तावेज जारी किए गए। इसके लिए डिजिटल डेटा, फीस लेजर, प्रवेश रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है।
मामले में SOG पहले ही श्री सत्य साईं यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मेडिकल साइंसेज (SSSUTMS), सीहोर से जुड़े कुलपति सहित तीन अधिकारियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इन गिरफ्तारियों और विश्वविद्यालय से जब्त डिजिटल तथा दस्तावेजी रिकॉर्ड की जांच के बाद अब केस का दायरा और बड़ा होता दिखाई दे रहा है।
फिलहाल SOG के सामने बड़ा सवाल यह है कि कथित बैकडेटेड रिकॉर्ड का मामला कुछ अभ्यर्थियों और एक पाठ्यक्रम तक सीमित था या विश्वविद्यालय के दूसरे पाठ्यक्रमों में भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई गई।
जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अन्य पाठ्यक्रमों की डिग्रियों में वास्तव में अनियमितता हुई या नहीं। फिलहाल इन पाठ्यक्रमों के रिकॉर्ड जांच के दायरे में हैं और किसी डिग्री को केवल इसी आधार पर फर्जी नहीं माना जा सकता।