



जयपुर। राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव के लिए टिकट की दावेदारी तेज होने के साथ ही टिकट दिलाने के नाम पर सक्रिय कथित ‘ठेकेदारों’ और बिचौलियों का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार कुछ लोग खुद को राजनीतिक दलों के बड़े नेताओं या टिकट वितरण में प्रभाव रखने वाले पदाधिकारियों का करीबी बताकर दावेदारों से संपर्क कर रहे हैं। कहीं टिकट पक्का कराने का भरोसा दिया जा रहा है तो कहीं इसके बदले मोटी रकम मांगे जाने की सूचनाएं सामने आई हैं। इस तरह की जानकारियां भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) तक भी पहुंची हैं। बताया जा रहा है कि एसीबी फिलहाल संदिग्ध गतिविधियों और संपर्कों से जुड़े तकनीकी इनपुट का विश्लेषण कर रही है।
प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस सहित राजनीतिक दलों में पार्षद टिकट के लिए बड़ी संख्या में आवेदन आए हैं। टिकट वितरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंचने के साथ ही दावेदारों के बीच राजनीतिक संपर्क और सिफारिशों का दौर भी तेज हो गया है।
इसी बीच कुछ ऐसे लोगों के सक्रिय होने की सूचनाएं मिली हैं, जो टिकट वितरण में भूमिका रखने वाले नेताओं और पदाधिकारियों से नजदीकी का दावा कर रहे हैं। ये लोग दावेदारों को टिकट दिलाने या टिकट पक्का कराने का भरोसा देकर प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक एसीबी को अलग-अलग माध्यमों से ऐसी जानकारियां मिली हैं कि कुछ स्थानों पर टिकट दिलाने के बदले पैसों की बातचीत हो रही है।
हालांकि, अभी तक किसी दावेदार की ओर से सीधे एसीबी के समक्ष लिखित शिकायत दिए जाने की जानकारी नहीं है। ऐसे में फिलहाल कार्रवाई निगरानी और सूचनाएं जुटाने के स्तर पर बताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार एसीबी की ओर से प्रतिदिन करीब 40 से 50 लोगों से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों और उपलब्ध तकनीकी इनपुट का विश्लेषण किया जा रहा है।
विशेष नजर उन लोगों पर बताई जा रही है, जो टिकट वितरण की प्रक्रिया के बीच अचानक सक्रिय हुए हैं और दावेदारों के सामने अपनी ऊंची राजनीतिक पहुंच का दावा कर रहे हैं। ऐसे कुछ लोगों के नाम भी एसीबी तक पहुंचने की बात सामने आई है।
इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि किसी नेता से नजदीकी बताना या किसी को टिकट दिलाने का दावा करना अपने आप में भ्रष्टाचार का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
इसलिए जांच का फोकस इस बात पर है कि क्या राजनीतिक पहुंच और टिकट दिलाने के नाम पर वास्तव में किसी दावेदार से रकम की मांग की गई या कोई लेन-देन हुआ।
यदि किसी दावेदार की शिकायत के साथ पैसे की मांग, लेन-देन या अन्य ठोस साक्ष्य सामने आते हैं तो मामले की प्रकृति के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
आगामी दिनों में राजनीतिक दलों की ओर से प्रत्याशियों के नाम घोषित किए जाने हैं। ऐसे में टिकट वितरण पूरा होने तक संदिग्ध संपर्कों और टिकट दिलाने के नाम पर होने वाली गतिविधियों पर निगरानी बने रहने की संभावना है।
विधानसभा चुनावों के दौरान भी टिकट दिलाने का झांसा देकर ठगी के मामले सामने आ चुके हैं। केशोरायपाटन विधानसभा क्षेत्र में टिकट दिलाने के नाम पर 10 लाख रुपए की ठगी का आरोप लगा था। कार्यकर्ता की शिकायत के बाद कोर्ट के आदेश पर मई 2024 में रेलवे कॉलोनी थाने में एफआईआर दर्ज हुई और आरोपी की गिरफ्तारी हुई थी।
इसी तरह अंता विधानसभा उपचुनाव-2025 के दौरान बारां के एक नेता को दिल्ली स्थित पार्टी कार्यालय का पदाधिकारी बनकर फोन करने और पैसे के बदले टिकट दिलाने का झांसा देने का मामला सामने आया था। बाद में बारां साइबर थाने में इसकी रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
टिकट वितरण के अंतिम दौर में राजनीतिक पहुंच का दावा करने वाले लोगों की सक्रियता दावेदारों के लिए भी चेतावनी है। किसी अनधिकृत व्यक्ति के टिकट दिलाने के दावे पर पैसे का लेन-देन न केवल ठगी का कारण बन सकता है, बल्कि परिस्थितियों के आधार पर कानूनी मुश्किल भी पैदा कर सकता है।