Sunday, 23 August 2026

भाजपा छोड़ने के बाद धर्मेंद्र गहलोत का नया वीडियो, 13 पत्रावलियों पर बोले- ‘अकेला दोषी कैसे?’, देवनानी पर भी लगाए आरोप


भाजपा छोड़ने के बाद धर्मेंद्र गहलोत का नया वीडियो, 13 पत्रावलियों पर बोले- ‘अकेला दोषी कैसे?’, देवनानी पर भी लगाए आरोप

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अजमेर। भाजपा की सदस्यता से इस्तीफा दे चुके अजमेर नगर निगम के पूर्व महापौर धर्मेंद्र गहलोत ने एक बार फिर वीडियो जारी कर चर्चित 13 पत्रावलियों के मामले में अपना पक्ष रखा है। करीब 6 मिनट 16 सेकेंड के वीडियो में गहलोत ने सवाल उठाया कि जब पूरे प्रकरण में निर्णय अलग-अलग प्रशासनिक और संस्थागत स्तरों पर हुए तो केवल उन्हें दोषी कैसे ठहराया जा सकता है।

अजमेर नगर निगम के पूर्व महापौर गहलोत ने वीडियो में राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। साथ ही उन्होंने एक पुराने प्रकरण का उल्लेख करते हुए उससे संबंधित शिकायत और तस्वीरें साझा करने का दावा किया तथा मामले की सच्चाई जनता के सामने लाने की मांग की है।

‘दाग से मुक्त होने तक भाजपा में नहीं लौटूंगा’

अजमेर नगर निगम के पूर्व महापौर धर्मेंद्र गहलोत ने कहा कि एक जनप्रतिनिधि होने के नाते वे पूरे मामले की सच्चाई जनता के सामने रखना चाहते हैं। उनके अनुसार जब यह बात सामने आई कि उन्हें प्रकरण में दोषी माना गया है तो उन्होंने भाजपा पर किसी तरह की आंच न आए, इसलिए स्वयं पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।

उन्होंने कहा कि जब तक वे इस आरोप से पूरी तरह मुक्त नहीं हो जाते, तब तक भाजपा में वापस शामिल नहीं होंगे।

गहलोत का दावा- पत्रावलियों पर मेरे हस्ताक्षर तक नहीं

13 पत्रावलियों को लेकर गहलोत ने कहा कि भवन स्वीकृति से संबंधित ऐसी फाइलें महापौर के स्तर पर स्वीकृति के लिए नहीं आती थीं और संबंधित पत्रावलियों पर उनके हस्ताक्षर भी नहीं हैं।

उनका कहना है कि तत्कालीन कमिश्नर और उपायुक्त के बीच विवाद के बाद 13 व्यापारियों से संबंधित पत्रावलियां निरस्त की गई थीं। इसके बाद उन्होंने जनप्रतिनिधि के तौर पर व्यापारियों और जनता का पक्ष उठाया था।

एम्पावर्ड कमेटी के फैसले का दिया हवाला

पूर्व महापौर ने दावा किया कि मामला बाद में सरकार की ओर से गठित एम्पावर्ड कमेटी के पास गया था। इस कमेटी में कमिश्नर स्तर के अधिकारी के साथ इंजीनियरिंग, तकनीकी और विधि से जुड़े अधिकारी शामिल थे।

अजमेर नगर निगम के पूर्व महापौर गहलोत के अनुसार कमेटी ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया था। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि निर्णय सामूहिक स्तर पर हुआ था तो अन्य संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई किए बिना केवल उन्हें जिम्मेदार ठहराना कैसे उचित हो सकता है।

साधारण सभा के फैसले को लेकर भी उठाए सवाल

अजमेर नगर निगम के पूर्व महापौर गहलोत ने कहा कि सरकार ने फाइलें अपने पास रखने के बाद तत्कालीन कमिश्नर को इन्हें नगर निगम की साधारण सभा में रखने के निर्देश दिए थे। उनके मुताबिक साधारण सभा में सत्ता और विपक्ष के पार्षदों के साथ तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद थे और निर्णय सर्वसम्मति से हुआ था।

उन्होंने दावा किया कि आज इस मुद्दे को उठा रहे कुछ लोग भी उस समय बैठक में मौजूद थे और उपस्थिति रजिस्टर पर उनके हस्ताक्षर हैं, लेकिन उस समय उनकी ओर से कोई विरोध दर्ज नहीं कराया गया था।

‘सात साल से फाइलें लंबित, फिर मुझे दोषी कैसे माना?’

अजमेर नगर निगम के पूर्व महापौर गहलोत ने कहा कि कमिश्नर की ओर से नोट ऑफ डिसेंट दिए जाने के बाद सरकार ने 26 अप्रैल 2019 को मामले को दोबारा साधारण सभा के सामने रखने के निर्देश दिए थे।

उन्होंने दावा किया कि करीब सात साल बीतने के बावजूद संबंधित पत्रावलियां दोबारा साधारण सभा में नहीं रखी गईं और अब तक नगर निगम में अनिर्णित अवस्था में हैं। गहलोत ने सवाल किया कि जब फाइलों का अंतिम निस्तारण ही नहीं हुआ तो उन्हें अकेले दोषी ठहराने का आधार क्या है।

देवनानी पर लगाया ‘दबाव की राजनीति’ का आरोप

वीडियो में अजमेर नगर निगम के पूर्व महापौर धर्मेंद्र गहलोत ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ की जा रही कार्रवाई के पीछे दबाव की राजनीति है। उन्होंने इस संदर्भ में विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी का नाम लेते हुए आरोप लगाए।

गहलोत ने भाजपा नेता महेंद्र जादम और भाजपा जिलाध्यक्ष रमेश सोनी का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें इन फाइलों से जुड़े तथ्यों की जानकारी है और उन्हें भी जनता के सामने वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

शिक्षा विभाग से जुड़े पुराने मामले को भी उठाया

वीडियो में अजमेर नगर निगम के पूर्व महापौर गहलोत ने देवनानी के वर्ष 2013 से 2018 के बीच शिक्षा मंत्री रहने के कार्यकाल से जुड़े एक पुराने मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कोटपूतली में कार्यरत कर्मचारी दिनेश शर्मा की आत्महत्या से संबंधित मामले को लेकर कई आरोप लगाए।

गहलोत ने दावा किया कि कर्मचारी की दो बेटियों ने इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री तक शिकायत की थी और प्रकरण की जांच प्रभावित हुई। उन्होंने मांग की कि पुराने मामले की भी निष्पक्ष जांच कर तथ्य सार्वजनिक किए जाएं।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है और संबंधित पक्ष का जवाब भी इस विवरण में उपलब्ध नहीं है। ऐसे में पूर्व महापौर द्वारा लगाए गए आरोपों को उनके दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

इस्तीफे के बाद लगातार सामने रख रहे अपना पक्ष

अजमेर नगर निगम के पूर्व महापौर धर्मेंद्र गहलोत अजमेर नगर निगम में भाजपा से दो बार महापौर रह चुके हैं। 13 पत्रावलियों से जुड़े विवाद के बीच उन्होंने हाल ही में भाजपा की सदस्यता से इस्तीफा दिया था। इसके बाद वे वीडियो और सार्वजनिक बयानों के जरिए लगातार अपना पक्ष रख रहे हैं। अब उनके नए वीडियो से अजमेर की स्थानीय राजनीति में 13 पत्रावलियों का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

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