



अजमेर। राजस्थान भाजपा में अंदरूनी खींचतान के बीच अजमेर के पूर्व मेयर धर्मेंद्र गहलोत ने पार्टी से इस्तीफा देने का ऐलान कर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। यह घटनाक्रम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि एक दिन पहले ही भाजपा ने आगामी नगरीय निकाय चुनावों को लेकर उन्हें नागौर जिले की जिम्मेदारी सौंपी थी।
स्वायत्त शासन विभाग की ओर से दो नोटिस जारी होने के बाद गहलोत ने अपनी नाराजगी सार्वजनिक की। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में उनके लिए पार्टी में बने रहना मुश्किल हो गया है।
भाजपा संगठन ने निकाय चुनावों की तैयारियों के तहत अलग-अलग नेताओं को जिलों की जिम्मेदारी सौंपी थी। इसी क्रम में धर्मेंद्र गहलोत को नागौर जिले का दायित्व दिया गया था। लेकिन जिम्मेदारी मिलने के महज एक दिन बाद उनके इस्तीफे के ऐलान ने संगठन के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं होने के संकेत दिए हैं। अजमेर से लेकर नागौर तक भाजपा कार्यकर्ताओं और राजनीतिक हलकों में इस फैसले की चर्चा तेज हो गई है।
गहलोत की नाराजगी की बड़ी वजह स्वायत्त शासन विभाग की ओर से जारी किए गए दो नोटिस बताए जा रहे हैं। इन नोटिसों के बाद उन्होंने खुलकर अपनी बात रखी और विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े किए।हालांकि, गहलोत की ओर से लगाए गए आरोपों पर संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
धर्मेंद्र गहलोत अजमेर की स्थानीय राजनीति में लंबे समय से सक्रिय चेहरा रहे हैं। ऐसे में उनके इस्तीफे की घोषणा का असर केवल संगठनात्मक स्तर तक सीमित नहीं रहने की संभावना है। नगरीय निकाय चुनाव से ठीक पहले सामने आए इस घटनाक्रम को भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब यह देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व गहलोत से बातचीत कर स्थिति संभालता है या उनका इस्तीफा औपचारिक रूप से स्वीकार किया जाता है।
फिलहाल धर्मेंद्र गहलोत ने इस्तीफे का ऐलान किया है। भाजपा संगठन की ओर से इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। वहीं, एक दिन पहले मिली चुनावी जिम्मेदारी और अगले ही दिन इस्तीफे की घोषणा ने पूरे घटनाक्रम को और दिलचस्प बना दिया है।