Thursday, 20 August 2026

फसल बीमा में बड़ा फर्जीवाड़ा: 10.37 हेक्टेयर जमीन का सात गुना बीमा, 31 लाख से ज्यादा क्लेम उठाने का आरोप


फसल बीमा में बड़ा फर्जीवाड़ा: 10.37 हेक्टेयर जमीन का सात गुना बीमा, 31 लाख से ज्यादा क्लेम उठाने का आरोप

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जयपुर। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में फर्जीवाड़े के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। टोंक और जयपुर के बाद अब श्रीगंगानगर जिले में भी बीमा पॉलिसियों से जुड़ा बड़ा मामला सामने आया है। सूरतगढ़ क्षेत्र के कालूसर गांव में एक ही खसरे की 10.37 हेक्टेयर भूमि पर कई अलग-अलग पॉलिसियां बनाकर वास्तविक क्षेत्रफल से करीब सात गुना अधिक भूमि का बीमा कराने का आरोप है। मामले में 31.15 लाख रुपए से अधिक का बीमा क्लेम प्राप्त किए जाने की बात भी सामने आई है।

मामला कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीना तक पहुंचने के बाद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। कृषि विभाग की पड़ताल में सामने आया कि खसरा नंबर 281/91 की वास्तविक भूमि के मुकाबले कई गुना अधिक क्षेत्रफल दिखाकर अलग-अलग बीमा पॉलिसियां जारी कराई गईं। इसके अलावा इसी भूमि पर अन्य किसानों की ओर से कराई गई कुछ पॉलिसियों को बीमा कंपनी ने रिजेक्ट भी कर दिया था। विभाग अब पूरे मामले में किसानों के साथ-साथ संबंधित सीएससी और ई-मित्र संचालकों की भूमिका की भी जांच करा रहा है।

ऐसे उठाया गया 31 लाख से ज्यादा का क्लेम

आरोप है कि कृषक बनवारी लाल ने खसरा नंबर 281/91 की 10.37 हेक्टेयर भूमि पर ऋणी किसान के रूप में मूंगफली की फसल का बीमा करवाया था।इसी खसरे पर सीएससी संचालक विकास कुमार के माध्यम से भी 10.37 हेक्टेयर और बिजेश के माध्यम से 10.30 हेक्टेयर क्षेत्रफल का अलग-अलग बीमा करवाया गया।इन तीन पॉलिसियों के आधार पर बनवारी लाल को कुल 23 लाख 35 हजार 319 रुपए का बीमा क्लेम मिलने की बात सामने आई है।इसी भूमि को बनवारी लाल की ओर से रिछपाल को बटाई पर दिए जाने की जानकारी भी जांच में सामने आई। रिछपाल ने भी इसी खसरे में मूंगफली की फसल का बीमा कराया और 7 लाख 80 हजार 195 रुपए का क्लेम प्राप्त किया।इस तरह दोनों के माध्यम से कुल 31 लाख 15 हजार 514 रुपए का बीमा क्लेम प्राप्त किए जाने का मामला सामने आया है।

टोंक और जयपुर में भी पकड़ा गया फर्जीवाड़ा

श्रीगंगानगर से पहले खरीफ-2026 के दौरान टोंक जिले की मालपुरा तहसील और जयपुर जिले की शाहपुरा तहसील में भी फर्जी फसल बीमा कराने की शिकायतें कृषि विभाग तक पहुंची थीं। गोपनीय सूचना के आधार पर कराई गई जांच में शिकायतों को सही पाए जाने के बाद विभाग ने कार्रवाई शुरू की। कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल की ओर से संबंधित किसानों, सीएससी संचालकों और अन्य लोगों के खिलाफ पुलिस थानों में एफआईआर दर्ज करवाकर कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

इन किसानों के नाम आए सामने

विभागीय कार्रवाई में टोंक जिले की मालपुरा तहसील के मुकेश सैनी पुत्र फूलचन्द सैनी, सीताराम सैनी पुत्र फूलचन्द सैनी और फूलचन्द पुत्र हजारी लाल सैनी के नाम सामने आए हैं। वहीं जयपुर जिले से दीपक सैनी पुत्र दिनेश सैनी और विनिता सैनी पत्नी सीताराम सैनी का नाम सामने आया है। इनके साथ संबंधित सीएससी (ई-मित्र) संचालकों और अन्य किसानों की भूमिका को लेकर भी कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए हैं।

कृषि मंत्री बोले- सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं

कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीना ने स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना समेत किसी भी सरकारी योजना में फर्जीवाड़ा या दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कृषि विभाग की कार्रवाई के बाद अब यह भी जांच का विषय है कि एक ही भूमि पर अलग-अलग पॉलिसियां किस स्तर पर और किन दस्तावेजों के आधार पर जारी की गईं। इसके साथ ही सीएससी संचालकों और बीमा प्रक्रिया से जुड़े अन्य लोगों की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है।

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