Thursday, 20 August 2026

विधानसभा का सत्र 20 अगस्त से, राजस्थान ट्रीज प्रोटेक्शन बिल-2026,यूसीसी और एक निजी विश्वविद्यालय विधेयक पेश किए जाने की संभावना


विधानसभा का सत्र 20 अगस्त से, राजस्थान ट्रीज प्रोटेक्शन बिल-2026,यूसीसी और एक निजी विश्वविद्यालय विधेयक पेश किए जाने की संभावना

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जयपुर। राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र गुरुवार से शुरू होने जा रहा है। नगरीय निकाय चुनाव की घोषणा के बीच शुरू हो रहे सोलहवीं विधानसभा के षष्टम सत्र में सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश कर सकती है। इनमें प्रस्तावित द राजस्थान ट्रीज (प्रोटेक्शन) बिल-2026 को लेकर प्रदेश के फर्नीचर और हस्तशिल्प उद्योग की चिंता बढ़ गई है।

विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू करेंगे। प्रस्तावित ट्रीज प्रोटेक्शन बिल में 29 प्रजातियों के पेड़ों को प्रतिबंधित श्रेणी में शामिल किए जाने का प्रावधान बताया जा रहा है। इनमें बबूल और शीशम भी शामिल हैं, जिनकी लकड़ी का राजस्थान के फर्नीचर, हस्तशिल्प और सजावटी उत्पादों के निर्माण में बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जाता है।

बिना मंजूरी पेड़ काटने पर एक लाख तक जुर्माना

प्रस्तावित विधेयक में प्रतिबंधित श्रेणी में शामिल पेड़ों को बिना अनुमति काटने पर कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। नियमों के उल्लंघन पर एक लाख रुपए तक जुर्माना और एक वर्ष तक सश्रम कारावास हो सकता है। इसी प्रावधान को लेकर लकड़ी आधारित उद्योग से जुड़े कारोबारियों और निर्यातकों में चिंता है। उनका कहना है कि पर्यावरण संरक्षण जरूरी है, लेकिन कानून बनाते समय वैध तरीके से प्राप्त लकड़ी, किसानों के खेतों में लगे पेड़ों और उद्योग की कच्चे माल की जरूरत को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट तथा व्यावहारिक व्यवस्था भी की जानी चाहिए।

बबूल की लकड़ी से बढ़ा राजस्थान का हस्तशिल्प कारोबार

राजस्थान में शीशम लंबे समय से फर्नीचर उद्योग के लिए महत्वपूर्ण लकड़ी रही है। वहीं पिछले करीब दो दशकों में बबूल की लकड़ी का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ा है। इससे फर्नीचर, हस्तशिल्प उत्पाद, सजावटी सामान और विभिन्न प्रकार के गिफ्ट आइटम बनाए जा रहे हैं।

राजस्थान में तैयार लकड़ी के कई उत्पादों की मांग घरेलू बाजार के साथ विदेशों में भी है। यूरोप और अमेरिका सहित विभिन्न देशों में इनका निर्यात किया जाता है। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी संख्या में कारीगर, श्रमिक, कारोबारी और निर्यातक जुड़े हुए हैं।

उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि बबूल और शीशम की उपलब्धता या परिवहन से संबंधित प्रक्रिया अत्यधिक जटिल हुई तो कच्चे माल की लागत बढ़ सकती है। इसका सीधा असर उत्पादन, रोजगार और निर्यात पर पड़ने की आशंका है।

उद्योग की मांग- व्यावहारिक प्रावधान करे सरकार

निर्यातकों और हस्तशिल्प कारोबारियों की मुख्य चिंता यह है कि कानून लागू होने के बाद वैध लकड़ी की खरीद, कटाई और परिवहन की प्रक्रिया स्पष्ट और सरल रहे। उद्योग का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य और उद्योग की व्यावहारिक जरूरतों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। कारोबारियों को आशंका है कि अनुमति प्रक्रिया कठिन होने से लकड़ी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में राजस्थान के पारंपरिक हस्तशिल्प उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर भी असर पड़ सकता है।

सरकार को घेरने की तैयारी में विपक्ष

मानसून सत्र के दौरान राजनीतिक माहौल भी गर्म रहने की संभावना है। विपक्ष ने विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार की है, जबकि सत्तापक्ष ने भी विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की तैयारी कर ली है। सत्र शुरू होने से एक दिन पहले विधानसभा अध्यक्ष की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई। इसके बाद कांग्रेस विधायक दल की बैठक हुई। वहीं मुख्यमंत्री आवास पर भाजपा विधायक दल की बैठक में सदन की रणनीति पर चर्चा की गई।

यूसीसी सहित अन्य विधेयक भी आ सकते हैं सदन में

मानसून सत्र में राजस्थान ट्रीज प्रोटेक्शन बिल-2026 के अलावा यूसीसी से संबंधित विधेयक और एक निजी विश्वविद्यालय से जुड़ा विधेयक भी सदन में पेश किए जाने की संभावना है। जीएसटी संशोधन विधेयक को लेकर अभी राज्यपाल की मंजूरी का इंतजार बताया जा रहा है। प्रारंभिक विधायी कार्य के बाद दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि दी जाएगी और सदन की कार्यवाही अगले दिन तक स्थगित की जा सकती है। फिलहाल सदन को करीब चार दिन चलाने की तैयारी है। हालांकि विधानसभा की कार्य सलाहकार समिति की बैठक में आगामी दिनों की कार्यवाही और विधायी कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया जाएगा।

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