



डिग्गी कल्याणजी की 61वीं लक्खी पदयात्रा जयपुर चौड़ा रास्ता स्थित ताड़केश्वर मंदिर से मुख्य केसरिया निशान के साथ रवाना हुए श्रद्धालु, रास्ते में भंडारे, भजन, रासलीला और सत्संग के कार्यक्रम
जयपुर। डिग्गी कल्याणजी की 61वीं लक्खी पदयात्रा मंगलवार सुबह 9 बजे चौड़ा रास्ता स्थित श्री ताड़केश्वर मंदिर से डिग्गीपुरी के लिए रवाना हुई। मुख्य केसरिया निशान की पूजा-अर्चना के बाद संत-महात्माओं ने ध्वज दिखाकर पदयात्रा को रवाना किया।
हजारों श्रद्धालु भजनों पर नाचते-गाते हुए पदयात्रा में शामिल हुए। यात्रा में भगवान भोलेनाथ सहित विभिन्न देवी-देवताओं की आकर्षक झांकियां भी सजाई गईं। कई श्रद्धालु विशेष धार्मिक संकल्प के साथ यात्रा में शामिल हुए। भक्त पांच दिन में करीब 75 किलोमीटर का सफर तय कर 22 अगस्त को डिग्गीपुरी पहुंचेंगे।
पदयात्रा शुरू होते ही चौड़ा रास्ता से टोंक रोड और सांगानेर तक श्रद्धालुओं के स्वागत का सिलसिला शुरू हो गया। जगह-जगह टेंट और भंडारे लगाए गए हैं, जहां पदयात्रियों के लिए भोजन, पानी और विश्राम की व्यवस्था की गई है।
यात्रा से एक दिन पहले सोमवार रात से ही राजस्थान के अलग-अलग क्षेत्रों से श्रद्धालुओं का जयपुर पहुंचना शुरू हो गया था। मंगलवार सुबह ताड़केश्वर मंदिर के आसपास बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित हुए।
61वीं लक्खी पदयात्रा का पहला पड़ाव मंगलवार को मदरामपुरा में होगा। इसके बाद यात्रा निर्धारित मार्ग से डिग्गीपुरी की ओर आगे बढ़ेगी।
यात्रा का कार्यक्रम इस प्रकार रहेगा—
18 अगस्त — मदरामपुरा
19 अगस्त — हरसूलिया
20 अगस्त — फागी
21 अगस्त — चौसला
22 अगस्त — डिग्गीपुरी
हर पड़ाव पर रात्रि विश्राम के साथ भजन, रासलीला और सत्संग के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
श्रद्धालु 22 अगस्त को डिग्गीपुरी पहुंचेंगे। इसी दिन शाम 5 बजे शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद भगवान कल्याणजी महाराज के निज मंदिर में गंगोत्री से लाए गए गंगाजल से अभिषेक किया जाएगा। रात में जागरण का आयोजन होगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे।
श्री कल्याण डिग्गीपुरी लक्खी पदयात्रा संघ जयपुर के संचालक एवं अध्यक्ष श्रीजी शर्मा ने बताया कि उनका परिवार तीसरी पीढ़ी से इस यात्रा की परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने बताया कि उनके दादा स्व. रामेश्वर लाल शर्मा ने वर्ष 1964 में पहली पदयात्रा शुरू की थी। इसके बाद वर्ष 1993 से 2011 तक उनके पिता प्रहलाद राय शर्मा ने यात्रा का संचालन किया। पिछले करीब 14 वर्षों से श्रीजी शर्मा इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
पदयात्रा के दौरान श्रद्धालु कल्याणजी महाराज के जयकारे लगाते और भजनों पर नाचते हुए आगे बढ़ते दिखाई दिए। देवी-देवताओं की झांकियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। पूरे मार्ग पर धार्मिक और उत्सवी माहौल नजर आया। श्रद्धालुओं की सेवा के लिए सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों की ओर से भी विभिन्न व्यवस्थाएं की गई हैं।
टोंक रोड और सांगानेर सहित यात्रा मार्ग पर सोमवार शाम से ही भंडारों की तैयारियां शुरू हो गई थीं। श्रद्धालुओं के लिए भोजन बनाने को जगह-जगह भट्टियां जलाई गईं। सेवा शिविरों में पीने के पानी, भोजन, चिकित्सा सहायता और विश्राम की व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने भी यात्रा मार्ग और श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़ी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया है।