



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक साल में 1 करोड़ युवाओं को एआई स्किल्स की ट्रेनिंग देने की घोषणा, 2047 तक विकसित भारत के लिए वर्क कल्चर बदलने पर जोर, महिला आरक्षण लागू करने के लिए राजनीतिक दलों से किया आग्रह
नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत, आत्मनिर्भरता, नक्सलवाद, महिला आरक्षण और युवाओं के कौशल विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य तय है और इसके लिए देश को अपनी सोच के साथ-साथ कार्य संस्कृति में भी बड़ा बदलाव करना होगा।
प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन क्षेत्रों में कभी नक्सलवाद का प्रभाव था, वहां अब विकास का तिरंगा लहरा रहा है। साथ ही उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए युवाओं को भटकाने वाली ताकतों से सावधान रहने की बात कही।
नक्सलवाद पर प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने नक्सलवाद समाप्त करने का संकल्प लिया था और आज कई नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हालात बदले हैं। उन्होंने कहा, “हथियारबंद नक्सल तो गए, लेकिन दिमागी नक्सल मौके की तलाश में हैं। इन दिमागी नक्सलों को पहचानना होगा और उन्हें युवाओं को भटकाने से रोकना होगा।” प्रधानमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद से मुक्त हो रहे क्षेत्रों में अब विकास तेजी से आगे बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री ने लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से महिला आरक्षण लागू करने में सहयोग करने की अपील करते हुए कहा कि माताओं और बहनों को देश की नीति निर्माण प्रक्रिया में अपना योगदान देने का अवसर मिलना चाहिए।उन्होंने राजनीतिक दलों से कहा कि वे इसका श्रेय भी लें, लेकिन महिलाओं को उनका अधिकार देने में आगे आएं।
प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा तय हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए देश को अपने ‘वर्क कल्चर’ और सोच में बदलाव करना होगा। उनका कहना था कि जो काम पिछले पांच से सात दशकों में नहीं हो सके, उन्हें आने वाले पांच से सात वर्षों में पूरा करने की गति और संकल्प के साथ आगे बढ़ना होगा।
युवाओं को लेकर प्रधानमंत्री ने बड़ा लक्ष्य रखते हुए कहा कि एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई से जुड़ी स्किल्स की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके साथ ही छात्रों के लिए ऑनलाइन फ्री कोचिंग व्यवस्था शुरू करने की बात भी कही गई। सरकार का जोर युवाओं को भविष्य की तकनीक के अनुरूप तैयार करने और रोजगार के नए अवसरों के लिए सक्षम बनाने पर रहेगा।
प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि भारत को दूसरे देशों पर निर्भर रहकर आगे नहीं बढ़ना चाहिए।उन्होंने कहा कि दुनिया में बहुत सी चीजें सस्ती और जल्दी उपलब्ध हो सकती हैं, लेकिन केवल दूसरे देशों से उन्हें हासिल करने से देश की अपनी क्षमता विकसित नहीं होती। इसलिए भारत को अपनी क्षमताओं को बढ़ाने, अपने हितों की रक्षा करने और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में लगातार काम करना होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब आत्मनिर्भरता की बात की जाती थी तो कुछ लोग इसे ग्लोबलाइजेशन के विपरीत बताते थे। उन्होंने कहा कि बीते एक दशक में दुनिया की परिस्थितियां बदली हैं और अब देश अपनी घरेलू क्षमताओं तथा रणनीतिक आत्मनिर्भरता पर ज्यादा जोर दे रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने देशवासियों से बड़े लक्ष्य तय करने का आह्वान करते हुए कहा कि अब छोटे सपनों से काम चलने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि बड़े सपने सोच को विस्तार देते हैं और जब संकल्प मजबूत होता है तो कठिन परिस्थितियों और आपदाओं के बीच से भी रास्ता निकालने का सामर्थ्य पैदा होता है। प्रधानमंत्री के संबोधन में विकसित भारत-2047, आत्मनिर्भरता, महिला सशक्तीकरण, एआई स्किलिंग और नक्सलवाद से मुकाबले को आने वाले वर्षों की प्रमुख प्राथमिकताओं के रूप में सामने रखा गया।