



धारीवाल-संधू पक्ष ने कहा—बीएनएसएस की धारा 18 के तहत पीपी या स्पेशल पीपी का नोटिफिकेशन जरूरी, एएसजी की अधिकृत नियुक्ति नहीं
जयपुर। एकल पट्टा प्रकरण में शुक्रवार को राजस्थान हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। सरकार की ओर से पैरवी करने दिल्ली से जयपुर पहुंचे एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू मामले में बहस नहीं कर सके। पूर्व मंत्री शांति धारीवाल और पूर्व आईएएस जीएस संधू की ओर से उनके मामले में पैरवी करने की वैधानिक पात्रता पर आपत्ति उठाई गई।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसपी शर्मा की अदालत में जैसे ही सुनवाई शुरू हुई, धारीवाल और संधू की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एसएस होरा और विवेक राज बाजवा ने कहा कि एएसजी एसवी राजू इस मामले में राज्य सरकार की ओर से पैरवी नहीं कर सकते।
बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि केस वापस लेने से जुड़े मामले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 18 के तहत पब्लिक प्रॉसिक्यूटर या स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर की नियुक्ति का विधिवत नोटिफिकेशन होना आवश्यक है।
अधिवक्ताओं ने कहा कि एसवी राजू के संबंध में ऐसा कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है। ऐसे में उनके पास इस मामले में सरकार की ओर से पैरवी करने की विधिक अथॉरिटी नहीं है।
आपत्ति सुनने के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से इस मुद्दे पर जवाब मांगा। अदालत ने पूछा कि एएसजी एसवी राजू को इस प्रकरण में सरकार की ओर से पेश होने और पैरवी करने का अधिकार किस आधार पर दिया गया है।
इस विवाद के चलते मामले में शुक्रवार को आगे की प्रभावी सुनवाई नहीं हो सकी।
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर के लिए तय कर दी है। अब अगली तारीख पर सरकार को एएसजी की नियुक्ति और पैरवी की वैधानिकता से संबंधित अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा।
एकल पट्टा प्रकरण में यह नया कानूनी मुद्दा जुड़ने के बाद अब निगाह इस बात पर रहेगी कि सरकार एएसजी की ओर से पैरवी को लेकर कौन-सा वैधानिक आधार अदालत के सामने रखती है।