Thursday, 13 August 2026

जल जीवन मिशन घोटाला: पूर्व मंत्री महेश जोशी समेत कई आरोपियों को हाईकोर्ट से झटका, जमानत याचिकाएं खारिज


जल जीवन मिशन घोटाला: पूर्व मंत्री महेश जोशी समेत कई आरोपियों को हाईकोर्ट से झटका, जमानत याचिकाएं खारिज

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करीब 20 हजार करोड़ रुपए के कथित भ्रष्टाचार मामले में पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल सहित अन्य आरोपियों को भी राहत नहीं, 5 अगस्त को सुरक्षित रखा था फैसला

जयपुर। जल जीवन मिशन से जुड़े करीब 20 हजार करोड़ रुपए के कथित भ्रष्टाचार मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी सहित कई प्रमुख आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। अदालत ने मामले में नामजद पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल और अन्य आरोपियों को भी राहत देने से इनकार कर दिया।

राजस्थान हाईकोर्ट की एकलपीठ ने मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद यह फैसला सुनाया। इससे पहले जस्टिस चंद्रप्रकाश श्रीमाली की एकलपीठ ने 5 अगस्त को सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया था।

इन आरोपियों की जमानत याचिकाएं भी खारिज

हाईकोर्ट ने पूर्व मंत्री महेश जोशी के अलावा पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल, संजय बड़ाया, महेंद्र प्रकाश सोनी, कृष्णदीप गुप्ता, संजीव कुमार गुप्ता, दिलीप कुमार गौड़ और मुकेश पाठक की जमानत याचिकाएं भी खारिज कर दीं। अदालत ने मामले की गंभीरता, कथित वित्तीय अनियमितताओं और आरोपियों की भूमिका को देखते हुए फिलहाल जमानत देने से इनकार किया।

राज्य सरकार ने किया जमानत का विरोध

जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश चौधरी, अधिवक्ता नेहा गोयल, अमन अग्रवाल और विनोद कुमार शर्मा ने आरोपियों की जमानत का कड़ा विरोध किया।

सरकारी पक्ष का कहना था कि जल जीवन मिशन के टेंडर और वित्तीय प्रक्रियाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं और पद का दुरुपयोग किया गया। अभियोजन ने अदालत से कहा कि आरोप गंभीर हैं और इनके व्यापक प्रभाव को देखते हुए आरोपियों को जमानत नहीं दी जानी चाहिए।

महेश जोशी की ओर से क्या दलील दी गई?

महेश जोशी की ओर से अधिवक्ता स्नेहदीप ने अदालत में कहा कि एफआईआर दर्ज होने के करीब डेढ़ साल बाद उनकी गिरफ्तारी हुई। यह भी तर्क दिया गया कि अप्रैल से दिसंबर 2025 तक ईडी की हिरासत में रहने के दौरान एसीबी ने उन्हें कस्टडी में लेने की कोशिश नहीं की।

बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि महेश जोशी बिड एवैल्यूएशन या फाइनेंस कमेटी के सदस्य नहीं थे और टेंडर प्रक्रिया प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा संचालित की गई थी।

महेंद्र प्रकाश सोनी की ओर से भी रखी गई दलील

तत्कालीन एसई महेंद्र प्रकाश सोनी की ओर से अधिवक्ता सुधीर जैन ने कहा कि समान तथ्यों के आधार पर एक से अधिक एफआईआर दर्ज की गई हैं। यह भी दलील दी गई कि ठेका फर्म के कुछ संचालकों को राहत मिल चुकी है और चार्जशीट दाखिल होने के बाद ट्रायल में लंबा समय लग सकता है।

अभियोजन ने मिलीभगत का आरोप लगाया

राज्य सरकार की ओर से इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा गया कि तत्कालीन मंत्री विभाग के प्रमुख थे और आरोप है कि अन्य आरोपियों के साथ मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ऊंची दरों पर टेंडर दिए गए।

अभियोजन ने तर्क दिया कि मामले में वित्तीय अनियमितताओं का दायरा बड़ा है और आरोपियों की भूमिका की गंभीरता को देखते हुए जमानत उचित नहीं होगी। दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने सभी संबंधित जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।

मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर

हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद अब आरोपियों के सामने उच्चतर न्यायिक मंच का विकल्प खुला रहेगा। वहीं, जल जीवन मिशन मामले में ट्रायल और जांच से जुड़ी कार्यवाही आगे जारी रहेगी।

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