



साइबर ठगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी और आरबीआई मैनेजर बताया, हवाला केस में गिरफ्तारी का डर दिखाकर 8 दिन में कई खातों में ट्रांसफर करवाए रुपए
जयपुर। जयपुर में साइबर ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। 90 वर्षीय पूर्व जिला जज को हवाला लेनदेन में गिरफ्तारी का डर दिखाकर साइबर ठगों ने करीब 15 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा और उनसे 2 करोड़ 50 लाख 51 हजार रुपए अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए।
एफआईआर के अनुसार ठगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी और आरबीआई मैनेजर बताकर पीड़ित को डराया। 3 से 10 अगस्त के बीच आठ दिनों में रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवाई गई। हालांकि एसबीआई के एक बैंक मैनेजर की सतर्कता से पीपीएफ खाते से होने वाला एक बड़ा ट्रांजैक्शन रुक गया और पूरे साइबर फ्रॉड का खुलासा हुआ। इसके बाद बुधवार शाम ज्योति नगर थाने में मामला दर्ज कराया गया।
पूर्व जज के भांजे रविन्द्र सिंह मोहनोत ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाई है। रिपोर्ट के अनुसार लालकोठी स्कीम निवासी गणपत सिंह भण्डारी (90) के मोबाइल पर 28 जुलाई को एक वॉट्सएप वीडियो कॉल आया।
कॉल करने वाला व्यक्ति पुलिस अधिकारी की वर्दी में था और उसने खुद को मुंबई सीबीआई का अधिकारी बताया। इसी कॉल के जरिए पीड़ित को कथित हवाला लेनदेन और जांच का डर दिखाया गया।
कुछ देर बाद दूसरे व्यक्ति ने वॉट्सएप कॉल कर खुद को आरबीआई मैनेजर बताया। उसने दावा किया कि हवाला की रकम से म्यूचुअल फंड में निवेश किया गया है और इस संबंध में वित्तीय जानकारी मांगी। गिरफ्तारी और जांच के डर से पीड़ित ने अपने म्यूचुअल फंड, बैंकिंग और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की जानकारी आरोपियों को उपलब्ध करा दी।
इसके बाद आरोपियों ने कथित जांच और सत्यापन के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा करवानी शुरू की। एफआईआर के अनुसार पीड़ित ने गांधी नगर स्थित अपने एसबीआई खाते से कई बार रकम ट्रांसफर की। 3 अगस्त से 10 अगस्त के बीच कुल 2 करोड़ 50 लाख 51 हजार रुपए अलग-अलग खातों में भेजे गए।
जब पीड़ित के पीपीएफ खाते से भी बड़ी राशि निकालने या ट्रांसफर करने की कोशिश हुई तो एसबीआई के मैनेजर को संदेह हुआ। बैंक अधिकारी ने सतर्कता दिखाते हुए ट्रांजैक्शन रोक दिया और मामले की जानकारी ली। पूछताछ में सामने आया कि बुजुर्ग पूर्व जज कई दिनों से साइबर ठगों के दबाव में थे और लगातार उनकी बात मानकर रकम ट्रांसफर कर रहे थे।
आरोप है कि साइबर ठगों ने पीड़ित को करीब 15 दिन तक वीडियो कॉल और अन्य डिजिटल माध्यमों से निगरानी में रखा। उन्हें किसी से संपर्क नहीं करने और जांच पूरी होने तक निर्देशों का पालन करने के लिए डराया गया। इसी दौरान आरोपियों ने गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर करोड़ों रुपए ट्रांसफर करवा लिए।
ज्योति नगर थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। अब पुलिस उन बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल माध्यमों की जानकारी जुटा रही है, जिनका इस्तेमाल ठगी के लिए किया गया। मामले में साइबर अपराधियों के नेटवर्क और रकम के आगे ट्रांसफर होने की कड़ियों का भी पता लगाया जा रहा है।