Thursday, 13 August 2026

सीकर में राजपूत समाज की भाजपा को चेतावनी, प्रतिनिधित्व नहीं मिला तो निकाय-पंचायत चुनाव में बहिष्कार का ऐलान


सीकर में राजपूत समाज की भाजपा को चेतावनी, प्रतिनिधित्व नहीं मिला तो निकाय-पंचायत चुनाव में बहिष्कार का ऐलान

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जन अभाव अभियोग निराकरण एवं सतर्कता समिति में एक भी राजपूत सदस्य नहीं होने पर नाराजगी; जिला भाजपा नेतृत्व पर उपेक्षा और भेदभाव के आरोप

सीकर।सीकर जिले में प्रशासनिक और राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर भाजपा के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया है। जिला जन अभाव अभियोग निराकरण एवं सतर्कता समिति में हालिया नियुक्तियों के बाद राजपूत समाज के प्रतिनिधियों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। समाज के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते विचार नहीं किया गया और विवादित नियुक्ति सूचियों में सुधार नहीं हुआ, तो आगामी नगर निकाय और पंचायतीराज चुनावों में भाजपा का बहिष्कार किया जाएगा।

मंगलवार को सीकर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान राजपूत समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने जिला भाजपा नेतृत्व पर समाज की लगातार उपेक्षा और राजनीतिक भेदभाव के आरोप लगाए। स्थानीय चुनावों से पहले सामने आए इस विरोध ने शेखावाटी क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों को गर्मा दिया है।

10 सदस्यीय समिति में एक भी राजपूत नहीं

राजपूत सभा सीकर के जिलाध्यक्ष रामसिंह पिपराली ने कहा कि सीकर जिले में राजपूत समाज लंबे समय से भाजपा को समर्थन देता आया है, लेकिन इसके बावजूद संगठन और प्रशासनिक नियुक्तियों में समाज के कार्यकर्ताओं को जगह नहीं दी जा रही।

उन्होंने आरोप लगाया कि जिला जन अभाव अभियोग निराकरण एवं सतर्कता समिति की 10 सदस्यीय सूची में एक भी राजपूत प्रतिनिधि शामिल नहीं किया गया। समाज के नेताओं ने इसे उपेक्षा और अपमानजनक स्थिति बताया।

भाजपा जिलाध्यक्ष पर नाम कटवाने का आरोप

रामसिंह पिपराली ने जिला भाजपा अध्यक्ष मनोज बाटड़ पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राजपूत समाज से जुड़े योग्य कार्यकर्ताओं के नाम जानबूझकर सूची से हटवाए गए।उन्होंने कहा कि यदि समाज के कार्यकर्ताओं को लगातार दरकिनार किया जाता रहा तो इसका राजनीतिक असर आने वाले चुनावों में देखने को मिलेगा।

संगठन में भी प्रतिनिधित्व नहीं मिलने पर नाराजगी

समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि केवल समिति ही नहीं, बल्कि भाजपा संगठन में भी राजपूत समाज को अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। उनका कहना है कि परंपरागत रूप से जिला कार्यकारिणी में महामंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद पर समाज का प्रतिनिधित्व रहता आया है, लेकिन इस बार उस परंपरा को भी तोड़ दिया गया। इसी कारण अब मामला केवल किसी एक पद या समिति की नियुक्ति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पार्टी के भीतर राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा बन गया है।

‘2018 का इतिहास दोहराने से नहीं चूकेंगे’

जिला महामंत्री गजेंद्र सिंह राजास ने भाजपा नेतृत्व को चेतावनी देते हुए कहा कि वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में भी उपेक्षा के कारण समाज ने अपनी नाराजगी दिखाई थी। उन्होंने कहा कि यदि मौजूदा परिस्थितियों में सुधार नहीं हुआ तो आगामी निकाय और पंचायतीराज चुनावों में भी समाज अपने राजनीतिक विकल्पों पर पुनर्विचार करेगा।

महिला विंग ने मांगा स्पष्ट जवाब

राजपूत समाज की महिला विंग की जिलाध्यक्ष डॉ. बीनू शेखावत ने कहा कि अब मामला केवल पद पाने का नहीं है। उन्होंने भाजपा नेतृत्व से यह स्पष्ट करने की मांग की कि किस नीति या आधार पर 10 सदस्यीय समिति में राजपूत समाज को एक भी स्थान नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि समाज को अब किसी पद की मांग नहीं, बल्कि पार्टी आलाकमान से इस उपेक्षा का स्पष्ट जवाब चाहिए।

निकाय-पंचायत चुनाव से पहले भाजपा के लिए चुनौती

राजपूत समाज की यह नाराजगी ऐसे समय सामने आई है, जब प्रदेश में नगर निकाय और पंचायतीराज चुनावों की तैयारियां तेज हो रही हैं। सीकर और शेखावाटी क्षेत्र में समाज का राजनीतिक प्रभाव महत्वपूर्ण माना जाता है।

ऐसे में भाजपा नेतृत्व के सामने अब स्थानीय स्तर पर असंतोष को शांत करने और प्रतिनिधित्व के सवाल का जवाब देने की चुनौती है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पार्टी इस विरोध पर क्या रुख अपनाती है और क्या नियुक्तियों में किसी तरह का बदलाव किया जाता है।

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