Thursday, 13 August 2026

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अलवर दौरे से पहले सियासी घमासान, प्रतिपक्ष नेता टीकाराम जूली ने वन राज्य मंत्री संजय शर्मा के धरने को बताया ‘फेस सेविंग ड्रामा’


केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अलवर दौरे से पहले सियासी घमासान, प्रतिपक्ष नेता टीकाराम जूली ने वन राज्य मंत्री संजय शर्मा के धरने को बताया ‘फेस सेविंग ड्रामा’

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प्रतिपक्ष नेता ने सरकार पर साधा निशाना—जब मंत्री की ही सुनवाई नहीं तो आम जनता कहां जाएगी, मुख्यमंत्री से मांगा जवाब

जयपुर। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रस्तावित अलवर दौरे से पहले राजस्थान की राजनीति गरमा गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने अलवर में मंत्री संजय शर्मा द्वारा जिला प्रशासन और नगर निगम की कार्यप्रणाली को लेकर धरना देने के मामले में राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। जूली ने इसे निकाय चुनाव से पहले किया जा रहा ‘फेस सेविंग ड्रामा’ बताते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से जवाब मांगा है।

जूली ने कहा कि यदि संविधान की शपथ लेने वाले राज्य सरकार के मंत्री को ही अपनी बात मनवाने के लिए धरने पर बैठना पड़ रहा है, तो आम नागरिक की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मंत्री स्तर तक की बात प्रशासन नहीं सुन रहा तो आम जनता अपनी शिकायत लेकर कहां जाएगी।

सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर उठाया सवाल

टीकाराम जूली ने मंत्री संजय शर्मा के नगर निगम में धरने का उल्लेख करते हुए कहा कि सफाई कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र नहीं मिलने की स्थिति अपने आप में प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि संजय शर्मा ने स्वयं कहा कि उन्होंने नगर निगम आयुक्त, जिला कलेक्टर, स्थानीय निकाय विभाग, संबंधित मंत्री और मुख्यमंत्री कार्यालय तक मामले को पहुंचाया, लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। जूली ने कहा कि यदि मंत्री की बात सही है तो सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इतने स्तरों पर मामला उठाए जाने के बाद भी समाधान क्यों नहीं हुआ।

‘ढाई साल बाद भ्रष्टाचार क्यों दिखाई दिया?’

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि निकाय चुनाव नजदीक आने के कारण अब भाजपा के नेताओं और मंत्रियों को प्रशासनिक खामियां और भ्रष्टाचार दिखाई देने लगा है।

जूली ने कहा कि यदि संबंधित मामलों में न्यायालय के आदेश काफी पहले हो चुके थे तो नियुक्तियां समय पर क्यों नहीं करवाई गईं। उन्होंने सवाल उठाया कि जो मुद्दे लंबे समय से लंबित थे, उन्हें चुनाव से पहले अचानक प्रमुखता से उठाने के पीछे क्या कारण है। उन्होंने इसे राजनीतिक नुकसान से बचने की कोशिश बताते हुए कहा कि जनता इस पूरे घटनाक्रम को देख रही है।

मंत्री की भाषा पर भी आपत्ति

टीकाराम जूली ने मंत्री संजय शर्मा द्वारा अधिकारियों के लिए कथित रूप से इस्तेमाल की गई भाषा पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से संयमित भाषा की अपेक्षा होती है। जूली ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक अधिकारियों को लेकर की गई तीखी टिप्पणियां यह दिखाती हैं कि सरकार के भीतर समन्वय की स्थिति ठीक नहीं है।

‘जब मंत्री की नहीं सुनवाई तो जनता कहां जाएगी?’

जूली ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से इस पूरे मामले में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि यदि मंत्री स्वयं प्रशासनिक सुनवाई नहीं होने की शिकायत कर रहे हैं तो जनता के लिए शिकायत निवारण की व्यवस्था किस तरह काम कर रही है। उन्होंने कहा कि यह केवल अलवर तक सीमित मुद्दा नहीं है, बल्कि शासन और प्रशासन के बीच समन्वय का सवाल है।

अमित शाह के दौरे से पहले सरकार पर हमला

जूली ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अलवर दौरे का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय नेतृत्व को भी अलवर की प्रशासनिक स्थिति देखनी चाहिए और यह समझना चाहिए कि किन परिस्थितियों में राज्य सरकार के मंत्री को सार्वजनिक रूप से धरने पर बैठना पड़ा।उन्होंने अलवर से जुड़े केंद्रीय नेताओं से भी इस मामले पर ध्यान देने की मांग की।

निकाय चुनाव से पहले बढ़ी सियासी बयानबाजी

प्रदेश में आगामी नगरीय निकाय चुनावों की तैयारियों के बीच अलवर का यह घटनाक्रम भाजपा और कांग्रेस के बीच नए राजनीतिक विवाद का कारण बन गया है। कांग्रेस इसे सरकार के भीतर प्रशासनिक असंतोष और चुनावी दबाव से जोड़ रही है, जबकि मंत्री संजय शर्मा की ओर से सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं।

आने वाले दिनों में यह मामला प्रदेश की चुनावी राजनीति में और गर्मा सकता है।


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