Thursday, 13 August 2026

जस्टिस यशवंत वर्मा पर लगे तीनों आरोप संसदीय जांच समिति ने सही पाए, संसद में पेश हुई रिपोर्ट


जस्टिस यशवंत वर्मा पर लगे तीनों आरोप संसदीय जांच समिति ने सही पाए, संसद में पेश हुई रिपोर्ट

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जस्टिस यशवंत वर्मा सरकारी आवास के स्टोररूम में बड़ी मात्रा में नकदी मिलने, सबूतों से छेड़छाड़ और संतोषजनक जवाब न देने के आरोप साबित

नई दिल्ली। जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े कैश मामले में संसद की जांच समिति ने उनके खिलाफ लगाए गए तीनों आरोपों को सही पाया है। यह मामला वर्ष 2025 में उनके सरकारी आवास के स्टोररूम से बड़ी मात्रा में नकदी मिलने से जुड़ा है। समिति की रिपोर्ट 12 अगस्त को लोकसभा और राज्यसभा में पेश की गई।

रिपोर्ट के अनुसार, स्टोररूम में बड़ी मात्रा में 500 रुपए के नोट और अधजले नोट मिले थे। हालांकि नकदी की गिनती नहीं की गई, नोट जब्त नहीं किए गए और नमूने भी सुरक्षित नहीं रखे गए। इसके चलते समिति वास्तविक राशि का निर्धारण नहीं कर सकी, लेकिन उपलब्ध गवाहियों और परिस्थितियों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला कि बड़ी मात्रा में नकदी मौजूद थी।

पहला आरोप: स्टोररूम में बड़ी मात्रा में बेहिसाब नकदी

जांच समिति के अनुसार, सरकारी आवास के स्टोररूम में 500 रुपए के नोटों के बंडल और अधजले नोट मिले थे। फायर सर्विस और पुलिसकर्मियों ने अपनी गवाही में बताया कि नोट एक जगह तक सीमित नहीं थे, बल्कि स्टोररूम के बड़े हिस्से में फैले हुए थे।

दिल्ली फायर सर्विस के कर्मचारी अंकित सहगल ने बताया कि उसने 500 रुपए के नोटों के बंडल देखे थे, जो करीब 7 से 8 फीट के हिस्से में फैले हुए थे। एक पुलिस अधिकारी से जब पूछा गया कि क्या नकदी की मात्रा 5 लाख रुपए से अधिक थी, तो उसने इसे बहुत छोटा अनुमान बताया। समिति ने माना कि भले ही नकदी की सही मात्रा निर्धारित नहीं की जा सकी, लेकिन बड़ी मात्रा में नकदी का मौजूद होना पर्याप्त रूप से स्थापित हुआ।

निष्कर्ष: आरोप साबित।

दूसरा आरोप: आग के बाद सबूतों से छेड़छाड़

समिति ने यह भी पाया कि आग बुझने के बाद स्टोररूम को तत्काल सील नहीं किया गया। सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि जस्टिस वर्मा के स्टाफ को रात करीब 3 बजे स्टोररूम की सफाई करते देखा गया।

सुबह तक जला हुआ सामान बाहर निकाल दिया गया और कमरा साफ कर दिया गया। वहां मिले नोट भी सुरक्षित नहीं रखे गए और बाद में बरामद नहीं हुए। समिति ने माना कि इस दौरान महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित नहीं रखा गया और उनसे छेड़छाड़ की स्थिति बनी।

निष्कर्ष: आरोप साबित।

तीसरा आरोप: जवाब टालमटोल वाले और भ्रामक

रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस वर्मा ने शुरुआत में कहा कि उन्हें नकदी के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। बाद में बचाव में नकदी को नकली बताए जाने और इसे साजिश के तहत वहां रखे जाने जैसी बातें सामने रखी गईं।

लेकिन इन दावों के समर्थन में कोई एफआईआर, शिकायत या ठोस दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। समिति के अनुसार, जस्टिस वर्मा ने स्वयं गवाही नहीं दी और अपने परिवार या स्टाफ को भी गवाह के रूप में प्रस्तुत नहीं किया। समिति ने उनकी सफाई को अधूरी, टालमटोल वाली और प्रभाव में भ्रामक माना।

निष्कर्ष: आरोप साबित।

नकदी की सही मात्रा नहीं हो सकी तय

समिति की रिपोर्ट में यह भी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि घटनास्थल से नोटों को औपचारिक रूप से जब्त नहीं किया गया था। उनकी गिनती भी नहीं की गई और न ही कोई नमूना संरक्षित किया गया। इसी वजह से समिति यह तय नहीं कर सकी कि स्टोररूम में वास्तव में कितनी राशि थी। हालांकि गवाहियों के आधार पर बड़ी मात्रा में नकदी की मौजूदगी को समिति ने स्वीकार किया।

संसद में पेश हुई रिपोर्ट

जांच समिति की रिपोर्ट लोकसभा और राज्यसभा के समक्ष रखी गई है। रिपोर्ट में तीनों आरोपों को सही पाए जाने के बाद मामला अब आगे की संवैधानिक और संसदीय प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण हो गया है।

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