Thursday, 06 August 2026

अंतरराष्ट्रीय साइबर स्लेवरी नेटवर्क पर राजस्थान पुलिस की कार्रवाई, सीकर से नौवां आरोपी गिरफ्तार


अंतरराष्ट्रीय साइबर स्लेवरी नेटवर्क पर राजस्थान पुलिस की कार्रवाई, सीकर से नौवां आरोपी गिरफ्तार

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कंबोडिया में नौकरी दिलाने और नए लोगों को भेजने के आरोप, भारत लौटने के बाद भी चीनी हैंडलर ‘Atai’ के संपर्क में रहने का दावा

जयपुर। राजस्थान पुलिस की स्टेट साइबर क्राइम थाना पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर स्लेवरी और साइबर फ्रॉड नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करते हुए सीकर से एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार इस संगठित नेटवर्क से जुड़े अब तक कुल नौ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस, साइबर क्राइम विजय कुमार सिंह ने बताया कि भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र से मिली सूचना, तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर मोहम्मद सद्दाम अंसारी उर्फ जेरी को गिरफ्तार किया गया है।

कंबोडिया भेजने के नाम पर 40 हजार रुपए लेने का आरोप

पुलिस के अनुसार वर्ष 2023 में आरोपी का संपर्क रोलसाबसर निवासी कथित एजेंट मुबारिक खान से हुआ था। एजेंट ने कंबोडिया के एक शॉपिंग मॉल में नौकरी दिलाने का आश्वासन देकर 40 हजार रुपए नकद लिए और इलेक्ट्रॉनिक वीजा तथा हवाई टिकट उपलब्ध कराए।

पुलिस का दावा है कि 31 अक्टूबर 2023 को मोहम्मद सद्दाम अपने तीन साथियों अनिल, पंकज और राशिद के साथ जयपुर से कंबोडिया गया।

पोईपेट की कंपनी में काम करने का दावा

जांच में सामने आया कि आरोपी ने कंबोडिया के पोईपेट स्थित एक कंपनी में काम किया। आंखों की समस्या के कारण लंबे समय तक कंप्यूटर पर काम नहीं कर पाने के बाद उसे कार्यालय की देखरेख, कर्मचारियों तक भोजन और कंबल पहुंचाने तथा मानव संसाधन से जुड़े काम सौंपे गए। पुलिस के अनुसार उसे करीब 800 अमेरिकी डॉलर प्रतिमाह वेतन मिलता था।

कर्मचारियों को उपनाम से बुलाने का आरोप

पुलिस का कहना है कि कंपनी में कर्मचारियों को वास्तविक नामों के बजाय अलग-अलग उपनामों से बुलाया जाता था। वहां करीब 200 लोग काम कर रहे थे, जिनमें बड़ी संख्या राजस्थान के ब्यावर क्षेत्र से थी।

कुछ कर्मचारी सीकर और केरल से भी बताए गए हैं। इन तथ्यों की जांच डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है।

लोगों को कंबोडिया बुलाने के बदले कमीशन

आरोप है कि मोहम्मद सद्दाम ने जनवरी और फरवरी 2024 में कुछ अन्य लोगों को भी नौकरी के लिए कंबोडिया बुलाया। इसके बदले उसे कंपनी से प्रति व्यक्ति 300 अमेरिकी डॉलर कमीशन मिलता था।

पुलिस के अनुसार विदेश भेजे जाने वाले लोगों से 30-30 हजार रुपए भी लिए गए। जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपी तीन अलग-अलग अवधियों में कंबोडिया गया और करीब दो साल तक वहां रहा।

भारत लौटने के बाद भी विदेशी हैंडलर से संपर्क

अनुसंधान में यह भी सामने आया है कि गिरोह से जुड़े कुछ आरोपी भारत लौटने के बाद भी कंबोडियाई नंबरों के माध्यम से व्हाट्सऐप चला रहे थे।

पुलिस का आरोप है कि वे चीनी हैंडलर ‘Atai’ के संपर्क में थे और आकर्षक नौकरी का झांसा देकर नए लोगों को कंबोडिया भेजने की तैयारी कर रहे थे।

मानव तस्करी और क्रिप्टो फ्रॉड की जांच

पुलिस ने बताया कि बरामद डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों का वैज्ञानिक परीक्षण जारी है। अंतरराष्ट्रीय साइबर स्लेवरी, मानव तस्करी और क्रिप्टो निवेश धोखाधड़ी से जुड़े नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

आरोपियों के वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा रही है। राज्य की अन्य जांच एजेंसियां भी संबंधित आरोपियों से पूछताछ कर रही हैं।

विशेष टीम ने की कार्रवाई

यह कार्रवाई पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत की गई।

एसपी साइबर क्राइम सुमित मेहरड़ा के सुपरविजन और डीएसपी एवं थानाधिकारी गजेंद्र शर्मा के नेतृत्व में टीम ने कार्रवाई की। इसमें सहायक उपनिरीक्षक बृजलाल सैनी, कांस्टेबल धर्मेंद्र, रोहिताश कुमार, सीआईडी-सीबी के कांस्टेबल अविनाश तथा सीकर पुलिस के एएसआई ताराचंद, दीनदयाल और अन्य पुलिसकर्मी शामिल रहे। मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। गिरफ्तारी दोषसिद्धि नहीं है।

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