Tuesday, 04 August 2026

अजमेर में हिस्ट्रीशीटर के कथित अवैध निर्माण पर बुलडोजर कार्रवाई


अजमेर में हिस्ट्रीशीटर के कथित अवैध निर्माण पर बुलडोजर कार्रवाई

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नौसर की सरकारी भूमि पर दुकान, पक्का निर्माण और चारदीवारी बनाने का आरोप; एडीए और पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई की

अजमेर। अपराधियों, भू-माफियाओं और सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत अजमेर में मंगलवार को बड़ी कार्रवाई की गई। अजमेर विकास प्राधिकरण ने कृष्णगंज थाना क्षेत्र के हिस्ट्रीशीटर हाजी अलीम खान के कथित अवैध निर्माण को बुलडोजर से हटाने की कार्रवाई शुरू की।

पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के निर्देश और अजमेर पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाला के नेतृत्व में की गई। पुलिस की अनुशंसा के आधार पर एडीए ने संबंधित व्यक्ति को सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने का अंतिम नोटिस दिया था।

सरकारी भूमि पर निर्माण करने का आरोप

प्रशासन का आरोप है कि ग्राम नौसर के खसरा संख्या 101 की सरकारी भूमि पर दुकान, पक्का निर्माण और चारदीवारी बनाकर अतिक्रमण किया गया था।

एडीए की ओर से हाजी अलीम खान को तीन दिन के भीतर स्वयं निर्माण हटाने का अंतिम अवसर दिया गया। निर्धारित समय में अतिक्रमण नहीं हटाए जाने पर प्राधिकरण ने पुलिस जाप्ते की मौजूदगी में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की।

कार्रवाई का खर्च भी वसूला जाएगा

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार कथित अवैध निर्माण को हटाने में आने वाला पूरा खर्च संबंधित व्यक्ति से वसूला जाएगा।

कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी विरोध की स्थिति से निपटने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात रहे।

एडीए और पुलिस अधिकारी रहे मौजूद

मौके पर अजमेर विकास प्राधिकरण के तहसीलदार महेश कुमार शेषमा, गिरदावर करतार जाट और पटवारी महिपाल सिंह मौजूद रहे।

कृष्णगंज थानाधिकारी अरविंद चारण के साथ अन्य पुलिस अधिकारी और जाप्ता भी कार्रवाई के दौरान तैनात रहा।

बीएनएस की धारा 107 के तहत कार्रवाई का दावा

पुलिस का कहना है कि राज्यभर में अपराधियों और अवैध कब्जाधारियों के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्रवाई की जा रही है। इसके अंतर्गत भारतीय न्याय संहिता की धारा 107 के प्रावधानों का भी उपयोग किया जा रहा है।

हालांकि संबंधित भूमि पर कब्जे, निर्माण की वैधता और आरोपी की भूमिका से जुड़े तथ्यों की अंतिम स्थिति राजस्व रिकॉर्ड, सक्षम प्राधिकारी के आदेश और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।




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