Monday, 03 August 2026

जनजातीय क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ा, 11.70 लाख से अधिक विद्यार्थी जुड़े


जनजातीय क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ा, 11.70 लाख से अधिक विद्यार्थी जुड़े

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63.26 लाख घरों के पेपरलेस सर्वे में 6,229 ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान, ब्रिज कोर्स के जरिए दोबारा विद्यालयों से जोड़ने की प्रक्रिया

जयपुर। राजस्थान सरकार ने दावा किया है कि जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा के विस्तार के लिए चलाई जा रही योजनाओं से सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों का नामांकन बढ़ा है। वर्ष 2025-26 की तुलना में शैक्षणिक सत्र 2026-27 में 14 हजार 780 विद्यार्थियों की वृद्धि दर्ज की गई और कुल नामांकन 11 लाख 70 हजार 242 तक पहुंच गया।

शिक्षा से वंचित बच्चों की पहचान के लिए प्रदेश में 63 लाख 26 हजार घरों का पेपरलेस सर्वे भी किया गया। सर्वे में चिह्नित 6 हजार 229 ड्रॉपआउट बच्चों को ब्रिज कोर्स के माध्यम से दोबारा विद्यालयों में प्रवेश दिलाने की प्रक्रिया चल रही है।

जनजातीय शिक्षा पर 164 करोड़ रुपए खर्च करने का दावा

राज्य सरकार के अनुसार जनजाति विकास के कुल बजट का 13 प्रतिशत से अधिक हिस्सा शिक्षा पर खर्च किया जा रहा है। यह राशि करीब 164 करोड़ रुपए बताई गई है।

दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को शिक्षा और आवास की सुविधा देने के लिए 10 नए आश्रम छात्रावास, दो आवासीय विद्यालय और एक खेल छात्रावास स्थापित करने के लिए 64 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है।

जनजातीय क्षेत्रों में संचालित हैं 9,817 विद्यालय

सरकारी आंकड़ों के अनुसार जनजातीय क्षेत्रों में कुल 9 हजार 817 विद्यालय संचालित हैं। इनमें 5 हजार 866 प्राथमिक विद्यालय, 1 हजार 664 उच्च प्राथमिक विद्यालय, 2 हजार 146 उच्च माध्यमिक विद्यालय और 141 संस्कृत विद्यालय शामिल हैं।

सरकारी विवरण में इन विद्यालयों में 11 लाख 81 हजार 100 से अधिक विद्यार्थियों के अध्ययनरत होने का आंकड़ा भी दिया गया है। यह संख्या नामांकन के लिए बताए गए 11 लाख 70 हजार 242 के आंकड़े से अलग है। दोनों आंकड़ों की अवधि अथवा गणना का आधार जारी विवरण में स्पष्ट नहीं किया गया है।

विशेष विद्यालयों का किया गया विस्तार

जनजातीय विद्यार्थियों को आधुनिक और प्रतिस्पर्धी शिक्षा से जोड़ने के लिए क्षेत्र में 69 पीएम श्री विद्यालय, 17 स्वामी विवेकानंद मॉडल विद्यालय, 210 महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय और 24 कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं।

इन संस्थानों के माध्यम से विद्यार्थियों को आवासीय सुविधा, डिजिटल शिक्षा, प्रयोगशाला, पुस्तकालय और अन्य शिक्षण संसाधन उपलब्ध कराने का दावा किया गया है।

आवासीय और डे-केयर संस्थानों का नेटवर्क

जनजातीय क्षेत्रों में आश्रम छात्रावास, खेल छात्रावास, कॉलेज छात्रावास, बहुउद्देशीय छात्रावास, आवासीय विद्यालय, मॉडल पब्लिक रेजिडेंशियल स्कूल, एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल और मां-बाड़ी डे-केयर केंद्रों सहित कुल 3 हजार 821 संस्थान संचालित बताए गए हैं।

इनकी कुल प्रवेश क्षमता 1 लाख 48 हजार 808 बताई गई है। सरकार का कहना है कि इस नेटवर्क से दूरस्थ गांवों के विद्यार्थियों को पढ़ाई जारी रखने और सुरक्षित आवासीय सुविधा पाने में मदद मिल रही है।

29 हजार से अधिक बालिकाएं और महिलाएं शिक्षा से जुड़ीं

ड्रॉपआउट बालिकाओं और महिलाओं को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा में लाने के लिए कालीबाई भील महिला संबल शिक्षा सेतु योजना चलाई जा रही है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2023 से जून 2026 के बीच योजना के माध्यम से 29 हजार से अधिक बालिकाओं और महिलाओं को शिक्षा से जोड़ा गया।

उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति पर 305 करोड़ रुपए व्यय

अनुसूचित जनजाति उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में 305 करोड़ रुपए खर्च कर 1 लाख 53 हजार 152 विद्यार्थियों को लाभ देने का दावा किया गया है।

इसके अतिरिक्त कालीबाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी योजना के माध्यम से पात्र छात्राओं को स्कूटी उपलब्ध कराकर उच्च शिक्षा तक उनकी पहुंच आसान बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों पर विशेष ध्यान

राज्य सरकार का कहना है कि जनजातीय बहुल और दुर्गम क्षेत्रों के बच्चों को विद्यालय तक लाने, पढ़ाई बीच में छोड़ चुके विद्यार्थियों की पहचान करने तथा छात्रावास और छात्रवृत्ति जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

सरकार के अनुसार नामांकन बढ़ाने के साथ शिक्षा की गुणवत्ता, सुरक्षित आवास और विद्यार्थियों के नियमित विद्यालय आने को सुनिश्चित करना जनजातीय शिक्षा नीति की प्रमुख प्राथमिकताएं हैं।

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