



विपक्ष ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग की, दोनों सदनों में विधायी कामकाज भी हुआ
नई दिल्ली। राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितता और नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे को लेकर सोमवार को लोकसभा में जोरदार हंगामा हुआ। विपक्षी सदस्यों की लगातार नारेबाजी और विरोध के कारण सदन की कार्यवाही मंगलवार तक स्थगित कर दी गई।
प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने दोनों मुद्दे उठाए। सदस्यों ने कथित राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण पर जवाब देने और प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई पर चर्चा कराने की मांग की। इन विषयों को लेकर पिछले कुछ दिनों से भी लोकसभा की कार्यवाही बाधित होती रही है।
विपक्षी सांसदों ने छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सदन में उपस्थित होकर बयान देने की मांग की। सदस्यों ने नारेबाजी करते हुए इस मामले में सरकार से जवाब मांगा।
लगातार व्यवधान के कारण प्रश्नकाल सुचारु रूप से नहीं चल सका। पीठ की ओर से सदस्यों से अपनी सीटों पर लौटने और सदन की कार्यवाही चलने देने की अपील की गई, लेकिन हंगामा जारी रहने पर कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
विपक्षी सांसदों ने अयोध्या राम मंदिर के लिए एकत्र चढ़ावे में कथित चोरी या गड़बड़ी का मुद्दा भी उठाया। इस विषय पर संसद परिसर में किए गए एक विरोध-प्रदर्शन और नाट्य प्रस्तुति को लेकर राजनीतिक विवाद पहले ही बढ़ चुका है। संबंधित प्रस्तुति के सिलसिले में कुछ सांसदों के खिलाफ वाराणसी में मामला दर्ज होने की खबर भी सामने आई है।
कथित चढ़ावा चोरी के आरोपों की अंतिम पुष्टि सक्षम जांच या न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
हंगामे के बीच लोकसभा ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सहित सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने संबंधी विधेयक पारित किया। फरवरी 2026 तक सुप्रीम कोर्ट की स्वीकृत न्यायिक क्षमता मुख्य न्यायाधीश सहित 34 थी।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार विधेयक को विस्तृत चर्चा के बिना पारित किया गया। इसके कानून बनने के लिए संसद की शेष प्रक्रिया और राष्ट्रपति की स्वीकृति आवश्यक होगी।
दूसरी ओर राज्यसभा में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास संशोधन विधेयक पारित किया गया। विधायी कामकाज पूरा होने के बाद उच्च सदन की कार्यवाही भी मंगलवार तक स्थगित कर दी गई।
विधेयक के प्रावधानों और सदन में हुई चर्चा का विस्तृत आधिकारिक विवरण उपलब्ध होने पर इसके प्रभाव की स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।