



महिला बॉक्सिंग के 70 किलोग्राम भार वर्ग में 5-0 से दर्ज की जीत, राजस्थान की मुक्केबाज ने ग्लासगो में रचा इतिहास
कोटा/ग्लासगो। कोटा की मुक्केबाज अरुंधति चौधरी ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। महिला बॉक्सिंग के 70 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में अरुंधति ने इंग्लैंड की चैंटेल रीड को सर्वसम्मत निर्णय से 5-0 से पराजित किया। इस जीत के साथ उन्होंने भारत की झोली में बॉक्सिंग का एक और स्वर्ण पदक डाल दिया।
फाइनल मुकाबले में अरुंधति ने शुरुआत से ही नियंत्रित और आक्रामक खेल दिखाया। उन्होंने सटीक पंच, बेहतर फुटवर्क और मजबूत रक्षात्मक तकनीक के जरिए इंग्लैंड की मुक्केबाज पर दबाव बनाए रखा। पांचों जजों ने भारतीय मुक्केबाज के पक्ष में फैसला दिया।
चैंटेल रीड ने सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया की लेकीशा पेरगोलिटी को 5-0 से हराकर खिताबी मुकाबले में जगह बनाई थी। फाइनल में घरेलू दर्शकों का समर्थन मिलने के बावजूद वह अरुंधति की तकनीक और आक्रामकता का प्रभावी जवाब नहीं दे सकीं।
अरुंधति की जीत भारत के लिए प्रतियोगिता का पांचवां बॉक्सिंग स्वर्ण पदक रही। उनसे पहले प्रीति पवार, जैस्मीन लैंबोरिया, साक्षी चौधरी और प्रिया घांघस ने अपने-अपने भार वर्ग में स्वर्ण जीते थे।
अरुंधति ने शुक्रवार को खेले गए सेमीफाइनल में वेल्स की रोजी एक्लेस को 4-0 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया था। उपलब्ध आधिकारिक खेल अपडेट के अनुसार सेमीफाइनल प्रतिद्वंद्वी रोजी एक्लेस थीं, न कि रोजी रसेल।
क्वार्टर फाइनल में उन्होंने न्यूजीलैंड की मॉर्गन हेंडरसन को 3-1 से पराजित किया था। लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए अरुंधति ने स्वर्ण पदक तक का सफर पूरा किया।
अरुंधति की जीत के बाद कोटा और राजस्थान के खेल प्रेमियों में खुशी की लहर है। यह उपलब्धि प्रदेश में महिला बॉक्सिंग और युवा खिलाड़ियों के लिए बड़ी प्रेरणा मानी जा रही है।
कोटा से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचीं अरुंधति पहले भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीत चुकी हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स का स्वर्ण उनके करियर की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हो गया है।
ग्लासगो में भारतीय मुक्केबाजों ने पदक मुकाबलों में मजबूत प्रदर्शन किया। अरुंधति की जीत ने महिला बॉक्सिंग में भारत की बढ़ती ताकत को फिर साबित किया।
उनका स्वर्ण पदक केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि राजस्थान में विकसित हो रही मुक्केबाजी प्रतिभाओं और प्रशिक्षण व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण सफलता है।