Saturday, 01 August 2026

देश ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ की दिशा में आगे बढ़ चुका है: अर्जुनराम मेघवाल


देश ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ की दिशा में आगे बढ़ चुका है: अर्जुनराम मेघवाल

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बीकानेर में केंद्रीय कानून मंत्री बोले—विधेयक का संयुक्त संसदीय समिति कर रही अध्ययन, राजस्थान में एक साथ निकाय चुनाव को बताया सकारात्मक पहल

बीकानेर। केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने कहा कि देश ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ की दिशा में आगे बढ़ चुका है। इससे संबंधित संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश होने के बाद संयुक्त संसदीय समिति के विचाराधीन है। उन्होंने राजस्थान में अलग-अलग नगर निकायों के चुनाव एक साथ कराने की तैयारी को चुनाव व्यवस्था में समन्वय की दिशा में सकारात्मक शुरुआत बताया।

मेघवाल शनिवार को बीकानेर में स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह में भाग लेने के बाद मीडिया से बातचीत कर रहे थे।

‘विधेयक का अध्ययन कर रही संसदीय समिति’

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने से संबंधित विधेयक संसद में पेश किया जा चुका है। विपक्ष की मांग के बाद इसे विस्तृत अध्ययन के लिए संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया था। समिति विधेयक के संवैधानिक, कानूनी और व्यावहारिक पहलुओं पर विचार कर रही है।

हालांकि विधेयक अभी कानून नहीं बना है। इसे लागू करने के लिए संसद से आवश्यक बहुमत के साथ मंजूरी और आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होना जरूरी होगा।

राजस्थान के स्थानीय चुनावों का दिया उदाहरण

मेघवाल ने कहा कि पहले बीकानेर नगर निगम, श्रीडूंगरगढ़ और देशनोक सहित विभिन्न निकायों के चुनाव अलग-अलग समय पर होते थे। अब स्थानीय निकायों के चुनाव एक साथ कराने की पहल की जा रही है, जिससे चुनावी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाया जा सकेगा।

राजस्थान में सभी नगरीय निकायों के चुनाव एक साथ कराने की नीति को राज्य स्तर पर ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ के रूप में प्रस्तुत किया जाता रहा है। यह व्यवस्था लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने वाले प्रस्तावित राष्ट्रीय मॉडल से कानूनी रूप से अलग है।

सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील

संसद में विपक्ष के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए मेघवाल ने कहा कि सदन और आसन की गरिमा बनाए रखना सभी सांसदों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष अपने दावों के समर्थन में ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर पाया।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद और विरोध लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं, लेकिन उनका प्रदर्शन संसदीय मर्यादाओं के भीतर होना चाहिए। ये टिप्पणियां केंद्रीय मंत्री का राजनीतिक पक्ष हैं; विपक्ष का इस पर अलग दृष्टिकोण हो सकता है।

नकल और पेपर लीक पर सख्त कानून का दावा

नकल विरोधी कानून पर मेघवाल ने कहा कि संसद में विस्तृत चर्चा के बाद परीक्षा संबंधी अनुचित साधनों के खिलाफ कठोर कानूनी प्रावधान किए गए हैं। इसका उद्देश्य पेपर लीक, डमी अभ्यर्थियों और संगठित नकल गिरोहों पर प्रभावी कार्रवाई करना है।

उन्होंने कहा कि कड़े दंड से परीक्षा माफिया में कानून का भय पैदा होगा और भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाओं की पारदर्शिता तथा निष्पक्षता मजबूत होगी।

‘चुनावी व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी’

मेघवाल ने दावा किया कि बार-बार चुनाव होने से प्रशासनिक व्यवस्था, सरकारी संसाधनों और विकास कार्यों पर प्रभाव पड़ता है। चुनावों में समन्वय होने से समय और संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा।

वहीं ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ के आलोचक संघीय व्यवस्था, विधानसभाओं के समयपूर्व भंग होने और जवाबदेही जैसे प्रश्न उठाते रहे हैं। इन पहलुओं पर संयुक्त संसदीय समिति के स्तर पर विचार किया जा रहा है।

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