



महामारी ने स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहने के साथ आकस्मिक चिकित्सा खर्चों के लिए आर्थिक तैयारी का महत्व भी समझाया। अस्पताल और उपचार पर होने वाला खर्च परिवार की बचत तथा नियमित आय को प्रभावित कर सकता है। ऐसी स्थिति में केवल बुनियादी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी हर व्यक्ति की सभी जरूरतों को पूरा करे, यह जरूरी नहीं है।
मुख्य पॉलिसी में उपलब्ध सुरक्षा को अपनी व्यक्तिगत जरूरतों के अनुरूप बढ़ाने के लिए हेल्थ इंश्योरेंस राइडर या ऐड-ऑन कवर लिए जा सकते हैं। अतिरिक्त प्रीमियम देकर मिलने वाले ये लाभ कुछ विशेष बीमारियों, खर्चों या परिस्थितियों को कवर कर सकते हैं, जो मूल पॉलिसी में शामिल नहीं होते अथवा सीमित रूप से उपलब्ध होते हैं।
हालांकि प्रत्येक राइडर की पात्रता, कवरेज, प्रतीक्षा अवधि, सीमा, अपवाद और दावा प्रक्रिया अलग हो सकती है। इसलिए इन्हें खरीदने से पहले संबंधित पॉलिसी वर्डिंग और कस्टमर इन्फॉर्मेशन शीट को ध्यान से पढ़ना आवश्यक है। भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण का स्वास्थ्य बीमा संबंधी मास्टर सर्कुलर भी बीमाकर्ताओं से पॉलिसी की शर्तें, अपवाद और ग्राहक को मिलने वाले लाभ स्पष्ट रूप से बताने की अपेक्षा करता है।
राइडर मुख्य स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के साथ लिया जाने वाला वैकल्पिक लाभ है। इसे जोड़ने पर पॉलिसीधारक को मूल कवर से अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है। इसके लिए अलग प्रीमियम देना पड़ता है और लाभ तभी तक प्रभावी रहता है, जब तक पॉलिसी एवं संबंधित राइडर सक्रिय हों।
अलग-अलग जोखिमों के लिए कई स्वतंत्र पॉलिसियां खरीदने के बजाय उपयुक्त राइडर के माध्यम से मौजूदा हेल्थ इंश्योरेंस को जरूरत के अनुसार तैयार किया जा सकता है। इससे बीमा सुरक्षा अधिक व्यवस्थित और उपयोगी बन सकती है।
बीमा बाजार में ‘राइडर’ और ‘ऐड-ऑन’ शब्दों का कई बार समान अर्थ में उपयोग होता है। दोनों ही अतिरिक्त प्रीमियम के बदले मुख्य पॉलिसी की सुरक्षा बढ़ाते हैं।
तकनीकी रूप से राइडर को मूल बीमा अनुबंध से जुड़ी अतिरिक्त शर्त या लाभ माना जा सकता है, जबकि ऐड-ऑन को अलग एंडोर्समेंट या वैकल्पिक कवर के रूप में जारी किया जा सकता है। वास्तविक अंतर संबंधित बीमाकर्ता के उत्पाद और दस्तावेजों पर निर्भर करेगा। इसलिए केवल नाम के बजाय लाभ, अपवाद और दावा शर्तों की तुलना करनी चाहिए।
ऐसे कवर में प्रतीक्षा अवधि लागू होना सामान्य है। इसकी अवधि प्रत्येक उत्पाद में अलग हो सकती है और पहले से जारी गर्भावस्था आमतौर पर कवर नहीं होती। कुछ बीमा उत्पादों में मैटरनिटी लाभ के लिए लंबी प्रतीक्षा अवधि निर्धारित होने के उदाहरण भी मिलते हैं।
परिवार शुरू करने की योजना बना रहे दंपतियों को यह कवर पर्याप्त समय पहले लेने पर विचार करना चाहिए।
इस लाभ में अस्पताल में भर्ती रहने के प्रत्येक पात्र दिन के लिए पहले से निर्धारित निश्चित राशि मिलती है। इसका उपयोग यात्रा, परिचारक, भोजन अथवा आय में कमी जैसे खर्चों को संभालने के लिए किया जा सकता है।
दैनिक राशि, न्यूनतम भर्ती अवधि, आईसीयू के लिए अतिरिक्त लाभ और भुगतान किए जाने वाले अधिकतम दिनों की संख्या पॉलिसी के अनुसार बदलती है।
क्रिटिकल इलनेस कवर में पॉलिसी में सूचीबद्ध गंभीर बीमारी की निर्धारित गंभीरता के अनुरूप पुष्टि होने पर एकमुश्त राशि मिल सकती है। कैंसर, हृदयाघात, स्ट्रोक और किडनी फेल्योर जैसी स्थितियां कुछ योजनाओं में शामिल होती हैं।
यह सामान्य मेडिक्लेम से अलग हो सकता है, क्योंकि इसमें वास्तविक अस्पताल बिल के बजाय तय बीमित राशि का भुगतान किया जाता है। बीमारी की परिभाषा, प्रारंभिक प्रतीक्षा अवधि और निदान के बाद जीवित रहने की न्यूनतम अवधि जैसी शर्तें उत्पाद के अनुसार अलग होती हैं। इसलिए केवल बीमारी का नाम देखकर कवर नहीं खरीदना चाहिए।
कई हेल्थ पॉलिसियों में कमरे के किराए पर प्रतिदिन या बीमित राशि के अनुपात में सीमा होती है। रूम रेंट वेवर उस सीमा को बढ़ा या हटा सकता है।
यह जांचना भी जरूरी है कि कमरे की श्रेणी बदलने पर डॉक्टर की फीस, नर्सिंग और अन्य चिकित्सा शुल्क पर आनुपातिक कटौती तो लागू नहीं होगी। अतिरिक्त प्रीमियम देकर रूम रेंट सीमा हटाने वाले लाभ स्वास्थ्य बीमा उत्पादों में उपलब्ध रहे हैं।
दुर्घटना के कारण मृत्यु, स्थायी पूर्ण दिव्यांगता अथवा कुछ योजनाओं में आंशिक दिव्यांगता होने पर निश्चित राशि दी जा सकती है। नियमित यात्रा करने वाले, जोखिमपूर्ण कार्य करने वाले या परिवार के मुख्य आय अर्जक के लिए यह उपयोगी हो सकता है।
कवर लेने से पहले दुर्घटना की परिभाषा, व्यावसायिक जोखिम से जुड़े अपवाद और दिव्यांगता के भुगतान प्रतिशत को समझना चाहिए।
ओपीडी कवर अस्पताल में भर्ती हुए बिना डॉक्टर से परामर्श, डायग्नोस्टिक जांच, दवाओं, फिजियोथेरेपी या छोटी चिकित्सा प्रक्रियाओं पर होने वाले कुछ खर्चों को कवर कर सकता है।
इसमें अस्पताल या क्लीनिक का नेटवर्क, वार्षिक सीमा, प्रति विजिट सीमा तथा कैशलेस या प्रतिपूर्ति की प्रक्रिया जांचना जरूरी है।
रिस्टोरेशन लाभ मूल बीमित राशि का पूरा या निर्धारित हिस्सा समाप्त होने के बाद उसे दोबारा उपलब्ध करा सकता है। लेकिन इसका अर्थ हर परिस्थिति में असीमित कवर मिलना नहीं है।
कुछ योजनाओं में यह लाभ केवल असंबंधित बीमारी, अलग व्यक्ति या भविष्य के क्लेम के लिए लागू होता है। कई उत्पादों में रिस्टोर की गई राशि का उपयोग उसी क्लेम में नहीं किया जा सकता। इसलिए इसकी शर्तें विशेष रूप से समझनी चाहिए।
क्लेम नहीं करने या कुछ उत्पादों में सीमित क्लेम होने पर नवीनीकरण के समय बीमित राशि बढ़ सकती है। इसे क्युमुलेटिव या नो-क्लेम बोनस कहा जाता है।
बोनस की वार्षिक दर, अधिकतम सीमा और क्लेम होने पर उसमें कटौती के नियम अलग-अलग हो सकते हैं। यह देखना चाहिए कि बोनस से बीमित राशि बढ़ती है या नवीनीकरण प्रीमियम में छूट मिलती है।
अस्पताल में उपयोग होने वाले दस्ताने, मास्क, सिरिंज, पीपीई किट और अन्य डिस्पोजेबल सामग्री का खर्च कई मूल पॉलिसियों में पूरी तरह देय नहीं होता। कंज्यूमेबल्स ऐड-ऑन निर्धारित सूची के अनुसार ऐसे खर्चों को कवर कर सकता है।
यहां भी सभी गैर-चिकित्सा वस्तुओं का भुगतान होना जरूरी नहीं है। बीमाकर्ता द्वारा जारी स्वीकार्य और अपवर्जित वस्तुओं की सूची देखनी चाहिए।
राइडर का चयन उम्र, परिवार की स्थिति, आय, पेशे, जीवनशैली, मौजूदा बीमारियों और पारिवारिक चिकित्सा इतिहास को ध्यान में रखकर होना चाहिए।
मैटरनिटी कवर लेते समय प्रतीक्षा अवधि, क्रिटिकल इलनेस में बीमारी की सटीक परिभाषा और रिस्टोरेशन लाभ में दोबारा उपलब्ध राशि के उपयोग की शर्तों की जांच करें। कमरे के किराए, सह-भुगतान, उप-सीमा और नेटवर्क अस्पतालों से जुड़ी शर्तें भी समझें।
राइडर खरीदने से पहले यह देखना चाहिए कि संबंधित लाभ मूल पॉलिसी में पहले से मौजूद तो नहीं है। एक ही प्रकार का दोहरा कवर लेने से अतिरिक्त प्रीमियम तो बढ़ सकता है, लेकिन जरूरी नहीं कि क्लेम के समय दोगुना लाभ मिले।
प्रीमियम के साथ यह भी देखें कि राइडर का अधिकतम भुगतान कितना है, किन परिस्थितियों में दावा स्वीकार होगा और कौन-से खर्च बाहर रखे गए हैं। स्वास्थ्य जरूरतों में बदलाव के अनुसार प्रत्येक नवीनीकरण पर पॉलिसी और राइडर की समीक्षा करना समझदारी है।
हेल्थ इंश्योरेंस राइडर मुख्य पॉलिसी को अधिक व्यापक और व्यक्तिगत जरूरतों के अनुरूप बना सकते हैं। फिर भी कोई राइडर केवल उसके प्रचारित लाभ के आधार पर नहीं चुना जाना चाहिए।
प्रतीक्षा अवधि, अपवाद, उप-सीमाएं, सह-भुगतान, दावा प्रक्रिया और नवीनीकरण की शर्तें समझने के बाद ही निर्णय लें। आवश्यकता होने पर अधिकृत बीमा सलाहकार से मार्गदर्शन लिया जा सकता है।
लेखक: अमरनाथ सक्सेना, चीफ टेक्निकल ऑफिसर–कमर्शियल, बजाज जनरल इंश्योरेंस