



राज्यपाल ने टोंक में नशामुक्त भारत और राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा की, नैतिक शिक्षा से चरित्र निर्माण पर दिया जोर
टोंक। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि युवा देश की सबसे बड़ी ताकत हैं और उन्हें नशे से बचाना सरकार, समाज, शिक्षकों तथा परिवारों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने नशीले पदार्थों के बढ़ते प्रचलन को चिंताजनक बताते हुए कहा कि विदेशों से भारत भेजी जाने वाली ड्रग्स का उद्देश्य केवल पैसा कमाना नहीं, बल्कि देश की युवा शक्ति को कमजोर करना भी है।
राज्यपाल बुधवार को एक दिवसीय दौरे पर टोंक पहुंचे। उन्होंने जिला परिषद सभागार में जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ संवाद कर विभिन्न जनहितकारी योजनाओं और कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने नशामुक्त भारत अभियान और राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए।
राज्यपाल बागडे ने कहा कि केंद्र सरकार ने नशामुक्त भारत अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। इस अभियान की शुरुआत सरकारी कार्यालयों और विभागों से होनी चाहिए। राजकीय अधिकारी एवं कर्मचारी किसी भी प्रकार के मादक पदार्थ का सेवन नहीं करें, ताकि वे समाज के समक्ष प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत कर सकें।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और विद्यालयों में शिक्षकों को विद्यार्थियों के व्यवहार में आने वाले परिवर्तनों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। शिक्षण संस्थानों में नशे के दुष्परिणामों के संबंध में नियमित जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएं।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों में नैतिक शिक्षा के माध्यम से चरित्र निर्माण किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों में नैतिक मूल्यों, अनुशासन, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्रहित की भावना को बढ़ावा देकर युवाओं को नशे जैसी बुराइयों से दूर रखा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के मार्गदर्शक होते हैं। ऐसे में नशामुक्त समाज के निर्माण में शिक्षक समुदाय की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। विद्यालयों और महाविद्यालयों में विद्यार्थियों को सकारात्मक तथा रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ा जाना चाहिए।
राज्यपाल ने राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को टीबी रोगियों की शीघ्र पहचान कर उनका तत्काल उपचार शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत स्तर पर टीबी के लक्षणों, जांच, उपचार और बचाव के उपायों को लेकर नियमित चर्चा एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
उन्होंने अधिकारियों से ‘टीबी मुक्त टोंक’ के लक्ष्य के साथ समन्वित रूप से कार्य करने को कहा। राज्यपाल ने कहा कि केवल सरकारी रिकॉर्ड में प्रगति दर्शाने के बजाय धरातल पर प्रत्येक रोगी तक जांच, उपचार और पोषण सहायता पहुंचना सुनिश्चित किया जाना चाहिए। राज्यपाल इससे पहले भी टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की पंचायत स्तर पर निगरानी और परिणामोन्मुख क्रियान्वयन पर जोर दे चुके हैं।
राज्यपाल बागडे ने कहा कि घर-घर सर्वेक्षण, नियमित स्क्रीनिंग और समय पर उपचार के माध्यम से टीबी से पीड़ित अनेक लोगों का जीवन बचाया जा सकता है। संदिग्ध रोगियों की शीघ्र जांच कर संक्रमण की श्रृंखला को रोकने के लिए प्रभावी प्रयास किए जाएं।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि टीबी रोगियों को निःशुल्क दवाओं के साथ समुचित पोषण सहायता भी उपलब्ध कराई जाए। इसके लिए अधिक से अधिक लोगों और संस्थाओं को ‘निक्षय मित्र’ बनाकर रोगियों को पोषण किट उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाएं। केंद्र का टीबी मुक्त भारत अभियान सक्रिय रोगी खोज, शीघ्र उपचार और सामुदायिक सहयोग पर आधारित है।
समीक्षा बैठक में अजमेर संभागीय आयुक्त शक्ति सिंह राठौड़, जिला कलेक्टर टीना डाबी, पुलिस अधीक्षक रोशन मीना सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।
